बयान में कहा गया कि इस प्रकार डीएपी की अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमतों में वृद्धि के बावजूद, इसे 1200 रुपये के पुराने मूल्य पर ही बेचे जाने का निर्णय लिया गया है। पीएमओ ने बताया कि इस मूल्य वृद्धि का सारा अतिभार केंद्र सरकार ने उठाने का फैसला किया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल डीएपी की वास्तविक कीमत 1700 रुपये प्रति बोरी थी। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 500 रुपये प्रति बोरी की दर से सब्सिडी दी जा रही थी। इसलिए कंपनियों से किसान 1200 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से डीएपी खाद खरीद रहे थे।
बैठक में मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करेंगे कि किसानों को मूल्य वृद्धि का दुष्प्रभाव न भुगतना पड़े। केंद्र सरकार ने इस फैसले को ऐतिहासिक व किसान हितैषी करार दिया है।
बयान के मुताबिक केंद्र सरकार हर साल रासायनिक खादों पर सब्सिडी पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। पीएमओ ने कहा, 'डीएपी उर्वरक में सब्सिडी बढ़ाने के साथ ही खरीफ सीजन में भारत सरकार 14,775 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करेगी।'
बड़ा सवाल यही है कि क्या मोदी सरकार का ये फैसला किसानों के मन में भरी नाराजगी को दूर या कुछ कम कर पाएगा। केंद्र को उम्मीद जरूर है कि इस फैसले का सकारात्मक असर दिखेगा। लेकिन, असल में ऐसा शायद ही हो पाए। कारण ये कि भले ही सब्सिडी बढ़ाई गई है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि किसानों को पहले से कम पैसा चुकाना पड़ेगा।
उन्हें अब भी उतनी ही जेब ढीली करनी होगी जितनी पहले करते थे। ऐसा इसलिए कि सब्सिडी के साथ डीएपी उर्वरक के दाम भी बढ़े हैं। ऊपर से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों और किसान नेताओं का रुख देखकर भी ऐसा नहीं लगता कि इस तरह के फैसले से वह वापस हटने वाले हैं। ऐसे में इसके बहुत बड़े असर के आसार तो नहीं लगते।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने डीएपी खाद की 50 किलोग्राम की बोरी पर 700 रुपये और कुछ अन्य उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि कर दी है। इससे किसानों पर सालाना 20 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और यह देश के अन्नदाताओं को गुलाम बनाने की साजिश है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से यह आग्रह भी किया कि इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लिया जाए।
सुरजेवाला ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि देश के 62 करोड़ किसानों-मजदूरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुलाम बनाने की साजिश कर रहे हैं। पिछले करीब साढ़े छह साल में मोदी सरकार ने खेती में इस्तेमाल की जाने वाली हर चीज की कीमत बढ़ाकर किसान पर पहले ही 15,000 रुपया प्रति हेक्टेयर सालाना का बोझ डाल रखा है। अब ऐसा फैसला लेना इस बात को साबित कर देता है कि भाजपा का डीएनए ही किसान विरोधी है।’
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएपी खाद के लिए सब्सिडी में 140 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का हार्दिक अभिनन्दन किया है। मुख्यमंत्री योगी ने इस ऐतिहासिक व किसान हितैषी निर्णय के लिए किसानों की ओर से प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस निर्णय से प्रदेश के 02 करोड़ 70 लाख किसान लाभान्वित होंगे। डीएपी खाद की प्रति बोरी सब्सिडी की राशि में कभी भी एक बार में इतनी वृद्धि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों के जीवन में व्यापक सकारात्मक बदलावों के लिए प्रधानमंत्री निरंतर प्रयासरत हैं। यह फैसला भी किसान कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृषि प्रधानता भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है। प्रधानमंत्री किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों के कल्याण व उत्थान के लिए कृतसंकल्पित है। किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त किए जाने के लिए उन्हें उन्नत तकनीक, प्रशिक्षण एवं अन्य किसान हितकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, उन्हें सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण कार्यक्रमों से भी जोड़ा गया है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को उनके उत्पाद उचित का मूल्य समय से पूर्ण पारदर्शिता के साथ डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हो।