सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रैंड नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी कुछ कहें और हंगामा न हो, ऐसा कम ही होता है। इस बार स्वामी के निशाने पर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति आए हैं।
स्वामी ने सोमवार को दावा किया कि कार्ति और उनकी कंपनियों के नाम विदेशों में 21 बैंक खाते हैं जिनकी जानकारी छुपाई गई है। स्वामी की बंदूक भले ही कार्ति की ओर तनी दिख रही थी लेकिन उनके निशाने पर कुछ और लग रहा था।
कार्ति को देनी पड़ी सफाई
सुब्रमण्यम स्वामी ने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा, "चिदंबरम की मदद कौन कर रहा है?... वित्त मंत्रालय में चिदंबरम के दोस्त!" तो समझ में आ रहा था कि उनका इशारा किस तरफ है। स्वामी के आरोपों के फौरन बाद ही कार्ति की सफाई भी आ गई कि उन्होंने सभी कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया है और कोई भी जानकारी छुपाई नहीं गई है।
विवादों से पुराना नाता स्वामी का
हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब स्वामी ने कुछ ऐसा कहा हो जो उनकी पार्टी या फिर सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सके। पिछले दिनों उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में मायावती की जीत के कयास लगाकर कई भाजपा समर्थकों को चौंका दिया था।
स्वामी के विवादास्पद बयानों लंबी श्रृंखला
15 फरवरी की शाम स्वामी ने टि्वटर पर लिखा, "मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश में मायावती ठीक वैसे ही जीतने में कामयाब रहेंगी, जैसे अमरीका में डोनल्ड ट्रंप ने जीत दर्ज की थी।" गुजरात में 'इस्लामिक डिवेलपमेंट बैंक' खुलने को लेकर छपी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वामी ने 3 फरवरी को ट्विटर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर के लिए सवाल दागा और कोर्ट में जाने की चेतावनी दी।
पिछले दिनों उन्होंने जर्नलिस्ट अर्णब गोस्वामी के प्रस्तावित चैनल के 'रिपब्लिक' नाम पर एतराज जताया था। इसके बाद सरकार की ओर से सफाई आई कि आवेदक ने 'रिपब्लिक' की जगह पर 'रिपब्लिक टीवी' के लिए आवेदन किया है।
स्वामी के विवादास्पद बयानों की एक लंबी श्रृंखला खोजी जा सकती है। पिछले साल रोहित वेमुला की खुदकुशी वाली घटना को लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए उन्होंने अपशब्द कहे थे।