देशभर के विश्वविद्यालयों में यदि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लानी है तो कुलपति की नियुक्ति सिफारिश नहीं, बल्कि मेरिट के आधार पर हो। मेरिट से नियुक्त होने पर कुलपति बिना किसी डर या दबाव के काम कर सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सुब्रह्मण्यम समिति ने कुलपति की नियुक्ति एकेडमिक मेरिट के साथ करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ नियम बनाने की भी सिफारिश की है।
सुब्रह्मण्यम समिति के सदस्यों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में आए दिन कुलपति पर सरकार के दबाव में आकर फैसले लेने की बात उठती हैं।
अधिकतर कुलपति की नियुक्तियां राजनीतिक होती हैं। ऐसे में वे सरकार के अनुसार फैसले करते हैं। फिलहाल सर्च कमेटी के समक्ष जो नाम जाते हैं, उन्हीं में से कुलपति के नाम का चयन होता है।
समिति की सिफारिश है कि बेशक कुलपति के नामों को सर्च कमेटी ही फाइनल करे, लेकिन वे नाम मेरिट के आधार पर चयनित होने चाहिए।
उनकी नियुक्ति काबिलियत, शोध, पढ़ाई में मिले अवार्ड आदि की उपलब्धियों के आकलन पर होनी चाहिए। समिति का मानना है कि विश्वविद्यालय केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन होते हैं। ऐसे में दोनों सरकारों को एक साथ मिलकर कुलपति की नियुक्ति के लिए नियम बनाने चाहिए। ताकि विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
Published By Rahul Sankrityayan