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₹22 हजार करोड़ का दावा, सुभाष चंद्रा देंगे ₹6.5 करोड़: राहुल का तंज- NCLT बना लूट ट्रिब्यूनल; विवाद क्यों?

Thu, 27 Aug 2026 10:46 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

22 हजार करोड़ रुपये से अधिक के दावों के बदले 6.5 करोड़ रुपये की भुगतान योजना मंजूर होने पर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस इसे आम लोगों और चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था का उदाहरण बता रही है। क्या है पूरा मामला? जानिए...
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सुभाष चंद्रा दिवालियापन मामला - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया में भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के मंजूर दावों के बदले कर्जदाताओं को सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार और न्यायाधिकरण पर हमला बोला।
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राहुल गांधी ने क्या कहा? 
राहुल गांधी ने न्यायाधिकरण को ‘नेता-कंपनी लूट न्यायाधिकरण’ बताया। उन्होंने कहा कि देश में दो अलग व्यवस्थाएं बना दी गई हैं। एक कुछ चुनिंदा अरबपतियों के लिए और दूसरी आम लोगों के लिए। उन्होंने कहा कि किसान का 50 हजार रुपये का कर्ज न चुकाने पर जमीन नीलाम हो जाती है, जबकि नौकरीपेशा व्यक्ति की किस्त छूटने पर बैंककर्मी घर पहुंच जाते हैं।

मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
  • भुगतान योजना के पक्ष में 80.81 फीसदी मताधिकार का समर्थन मिला।
  • विरोध करने वाले कर्जदाताओं की हिस्सेदारी 20 फीसदी से कम थी।
  • भारतीय जीवन बीमा निगम आवास वित्त के नेतृत्व वाले कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया।
  • न्यायाधिकरण के दो सदस्यों का फैसला अलग-अलग था।
  • तीसरे सदस्य निलेश शर्मा ने 144 पन्नों के आदेश में योजना को मंजूरी दी।
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जयराम रमेश बोले- यह मुंडन है
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वित्तीय भाषा में कर्ज की पूरी रकम न मिलने पर अंतर को प्रतिशत के रूप में ‘हेयरकट’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यहां कर्जदाताओं को करीब 99.97 फीसदी का हेयरकट सहना होगा। यह सिर्फ हेयरकट नहीं, बल्कि ‘मुंडन’ है और इससे दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का मजाक बन गया है।

सुरजेवाला ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि 50 से 90 फीसदी के बाद अब 99 फीसदी तक का हेयरकट हो रहा है। उन्होंने इसे उद्योगपतियों के कर्जमाफी जैसा बताया। उन्होंने वित्त मंत्री से यह बताने की मांग की कि इस व्यवस्था के जरिए हेयरकट के नाम पर कितने लाख करोड़ रुपये की रकम गई है।

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न्यायाधिकरण ने क्या कहा?
निलेश शर्मा ने कर्जदाताओं की आपत्तियां खारिज कर दीं। आदेश में कहा गया कि सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य प्रस्तावित रकम से काफी कम है। योजना खारिज होने पर उनके दिवालिया होने की स्थिति में विरोधी कर्जदाताओं को अधिक वसूली की संभावना नहीं थी। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि उसका काम कर्जदाताओं के व्यावसायिक फैसले की जगह अपना फैसला देना या भुगतान राशि की पर्याप्तता तय करना नहीं है।
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सुभाष चंद्रा का पक्ष
सुभाष चंद्रा ने कहा कि व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया में उनके खिलाफ कुल दावा 3,992 करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि वह इस रकम के व्यक्तिगत गारंटर थे, कर्ज लेने वाले नहीं। उनके मुताबिक, उन्होंने किसी भी कर्जदाता से कोई पैसा उधार नहीं लिया। 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक के दावों के बदले 6.5 करोड़ रुपये की भुगतान योजना मंजूर होने पर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस इसे आम लोगों और चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था का उदाहरण बता रही है।
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