नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च (एनआईपीजीआर) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित करके नाइट्रोजन के प्रभावी उपयोग को बढ़ाया जा सकता है। यह नाइट्रेट के उच्च-आवश्यकता वाले ट्रांसपोर्टर (एचएटी) को नियंत्रित करता है, जो पौधों और जानवरों में पाए जाने वाले प्रोटीन होते हैं।
फसलों के उत्पादन में नाइट्रोजन उर्वरक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन जब इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाता है तो यह हमारे भूजल को दशकों तक प्रदूषित कर सकता है। अब एक नए अध्ययन से पता चला है कि पौधों में नाइट्रिक ऑक्साइड (एनओ) के स्तर को कम करके धान और अरेबिडोप्सिस पौधों में नाइट्रोजन अवशोषण और नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (एनयूई) में काफी सुधार किया जा सकता है।
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च (एनआईपीजीआर) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित करके नाइट्रोजन के प्रभावी उपयोग को बढ़ाया जा सकता है। यह नाइट्रेट के उच्च-आवश्यकता वाले ट्रांसपोर्टर (एचएटी) को नियंत्रित करता है, जो पौधों और जानवरों में पाए जाने वाले प्रोटीन होते हैं। यह पोटेशियम के अवशोषण को बढ़ावा देता है और पौधों के विकास, प्रजनन और रोग प्रतिरोध में मदद करता है। अध्ययन के दौरान देखा गया है कि सही नाइट्रोजन स्तर और आनुवंशिक बदलावों के माध्यम से कम नाइट्रोजन का उपयोग करके उपज बढ़ाने में सफलता मिली है।
शोध के अनुसार नाइट्रोजन के अवशोषण को और अधिक कुशल बनाने के लिए फाइटोग्लोबिन (जो एक प्राकृतिक एनओ है) का अधिक उपयोग किया गया। इससे नाइट्रेट ट्रांसपोर्टर की सक्रियता बढ़ी, जिससे नाइट्रोजन के अवशोषण में सुधार हुआ। यह तरीका पारंपरिक और पर्यावरण के लिए हानिकारक उर्वरकों से अलग है और इसके द्वारा नाइट्रोजन के कम इस्तेमाल से फसलों की उपज बढ़ाने का स्थायी समाधान मिल सकता है।
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नई प्रबंधन नीतियों के अपनाने का समय
शोधकर्ताओं का कहना है कि नाइट्रोजन के उपयोग को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा तकनीकें मुख्य रूप से खेती संबंधी विधियों पर गौर करती हैं जैसे कि विभाजित खुराकों में अकार्बनिक नाइट्रोजन उर्वरकों का उपयोग, जहां उर्वरक धीमी गति से निकलते हैं। हालांकि इन तकनीकों में किसानों के लिए अतिरिक्त खर्चे के साथ कई कमियां बताई गई हैं।
अकार्बनिक उर्वरकों के निर्माण के दौरान दुनियाभर में ग्रीनहाउस उत्सर्जन में भी बढ़ोतरी होती है। वैश्विक स्तर पर नाइट्रोजन उर्वरकों के प्रयोग में वृद्धि हो रही है। समय आ गया है कि हम पुराने तरीकों से बाहर निकलकर जलवायु और जल गुणवत्ता की रक्षा के लिए नए प्रबंधन रणनीतियां अपनाएं।