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सेहत: ICMR और हैदराबाद विवि के अध्ययन में आया सामने, किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा रही पेट की चर्बी

Wed, 22 May 2024 05:36 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

परीक्षण के दौरान शोधकर्ताओं ने चूहों को दो मॉडल में रखा। एक विस्टार एनआईएन मॉडल था और दूसरे में उच्च वसा (40%) वाले चूहे थे। प्रोटीनूरिया के लिए सेलुलर और आणविक आधार पर दोनों मॉडल की जांच की, जिसमें दोनों ही मॉडल के चूहों में गंभीर प्रोटीनूरिया मिला।
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Kidney - फोटो : istock
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विस्तार
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पेट की चर्बी किडनी के लिए घातक हो सकती है। यह अंदर ही अंदर किडनी की स्वस्थ कोशिकाओं को चोटिल कर सकती है, जिससे व्यक्ति गंभीर किडनी रोग की चपेट में आ सकता है।

नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई है, जिसमें शोधकर्ताओं ने मोटापे से प्रेरित प्रोटीनूरिया के तंत्र की जांच की है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार पासुपुलती ने बताया कि अध्ययन नेचर प्रेस जर्नल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी में प्रकाशित हुआ है। इसमें आईसीएमआर के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) की टीम के साथ परीक्षण किया गया। डॉ. अनिल ने बताया कि मोटापा ग्रस्त लोगों में किडनी रोगों का जोखिम अधिक हो सकता है, क्योंकि ऐसे लोगों में प्रोटीनूरिया की वजह कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। यही प्रोटीनूरिया जब गंभीर स्थिति में पहुंचने लगता है, तो किडनी की कोशिकाओं पर हावी होने लगता है और उन्हें चोटिल करता है।

चूहों में मिले गंभीर परिणाम

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परीक्षण के दौरान शोधकर्ताओं ने चूहों को दो मॉडल में रखा। एक विस्टार एनआईएन मॉडल था और दूसरे में उच्च वसा (40%) वाले चूहे थे। प्रोटीनूरिया के लिए सेलुलर और आणविक आधार पर दोनों मॉडल की जांच की, जिसमें दोनों ही मॉडल के चूहों में गंभीर प्रोटीनूरिया मिला। नेफ्रॉन में महत्वपूर्ण कोशिकाएं पोडोसाइट्स घायल पाई गईं। उन्होंने सेलुलर विकृतियां देखी गईं।

अब इलाज की खोज में जुटे
शोधकर्ताओं ने बताया कि मोटापा ग्रस्त लोगों में किडनी चोटिल होने के कारण पता चलने के बाद अब इलाज की खोज के लिए अध्ययन शुरू किया है। इसके तहत पोडोसाइट कोशिकाओं को चोट से बचाने और प्रोटीनूरिया को नियंत्रित करने के विकल्पों की तलाश की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड से अनुमति भी मिली है।

 देश में सात करोड़ लोग अति मोटापे के शिकार

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आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) के वैज्ञानिक डॉ. जी. भानु प्रकाश रेड्डी ने कहा कि वर्तमान समय में मोटापा महामारी और विकराल रूप ले रही है। भारत की बात करें तो 20 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में करीब सात करोड़ लोग अति मोटापे की चपेट में है। इनमें 4.40 करोड़ महिलाएं और 2.60 करोड़ पुरुष शामिल हैं। वहीं, दूसरी ओर हर साल भारत में एक लाख से ज्यादा मामले किडनी फेलियर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। अन्य किडनी रोगियों की संख्या इनसे कई गुना अधिक है। अभी तक मोटापा और क्रोनिक किडनी रोग के बीच संबंध अज्ञात है, जिसके लिए यह अध्ययन किया गया।

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