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किसानों की जिंदगी में ‘मिठास’ घोल रहे हंसराज कालेज के छात्र, बना रहे आंत्रप्रेन्योर

Tue, 18 Sep 2018 12:17 PM IST
हरेंद्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किसानों को मधुमक्खी पालन सिखा रहे हैं हंसराज कालेज के छात्र - फोटो : Amar Ujala
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कहते हैं, “कामयाबी की राह में लाख कांटे बिछे हों, लेकिन अगर हौसले मजबूत हों और कुछ कर गुजरने का जुनून सवार हो, तो मंजिल आप के कदमों को जरूर चूमेगी।” कुछ ऐसा ही दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कालेज के छात्रों के साथ हो रहा है। जो तमाम दिक्कतों और वित्तीय अभावों के बावजूद किसानों की जिंदगी में ‘मिठास’ लाने में पूरी तत्परता से जुटे हुए हैं।
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सिखा रहे मधुमक्खी पालन

दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कालेज के छात्र कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग के साथ मिल कर किसानों की जिंदगी में ‘मिठास’ घोल रहे हैं। ये छात्र किसानों की आय बढ़ाने के लिए एनजीओ अनैक्टस के साथ मिल कर प्रोजेक्ट मिठास के जरिए किसानों को मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर) की तकनीक सिखा रहे हैं।

किसानों को बनाते हैं आंत्रप्रेन्योर

प्रोजेक्ट मिठास की हेड और हंसराज कालेज में इंग्लिश ऑनर्स कर रही द्वितीय वर्ष की छात्रा अपूर्वा सहगल के मुताबिक कॉलेज सोसाइटी ने अनैक्टस के साथ मिल कर किसानों की मदद करने का काम करती है। सहगल का कहना है कि देश में बहुत से ऐसे किसान हैं, जो कम कृषि भूमि और कम आय के चलते गरीबी में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। लेकिन अनैक्टस के जरिए हम उन्हें अतिरिक्त कमाई करने का मौका देते हैं और उनमें आंत्रप्रेन्योर या व्यवसायिक बनने की इच्छा पैदा करते हैं। 
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खेत में शुरू कर सकते हैं मधुमक्खी पालन

किसानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग देते दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र - फोटो : Amar Ujala
सहगल का कहना है कि इसके लिए हमें मधुमक्खी पालन को चुना, क्योंकि यह मौजूदा कृषि भूमि में ही किया जा सकता है। साथ ही, इसके लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं पड़ती और लागत भी कम आती है। साथ ही दो से तीन महीने में ही कमाई शुरू हो जाती है। साथ ही, इसके लिए किसानों को 10 से 15 दिन की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है।  

सब्सिडाइज कीमत में मधुमक्खी बॉक्स

इसी प्रोजेक्ट में काम कर रहीं इकोनॉमिक ऑऩर्स में द्वितीय वर्ष की छात्रा सान्या ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश के नगलागज्जु और हरियाणा में कैथल के कुछ गांवों में शुरू किया जा चुका है। सान्या का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में नेशनल बी बोर्ड के अलावा कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग और हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज भी किसानों को सब्सिडाइज कीमत में मधुमक्खी बॉक्स उपलब्ध करा रहा है। 

6 से 7 महीने में ही लागत वसूल

- फोटो : Amar Ujala
सान्या ने बताया कि जहां पर सरसों की खेती बहुतायत में होती है, वहां मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं। एक मधुमक्खी बॉक्स की कीमत दो हजार से ढाई हजार तक होती है और एक खेत में 50 से 100 बॉक्स लगाए जा सकते हैं और 6 से 7 महीने में ही लागत वसूल हो जाती है। सान्या का कहना है कि किसान आसानी से शहद और उससे जुड़े उत्पाद बेच कर साल में एक लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं।

बेचने में भी करते हैं मदद

सान्या ने बताया कि वे पहले ट्रेनिंग के इच्छुक किसानों का पता लगाते हैं और ट्रेनिंग लेने के बाद जब शहद तैयार हो जाता है, तो उसे बेचने में भी मदद करते हैं। इसका मुख्य सीजन चार महीने जनवरी से अप्रैल तक होता है। इसे बाद उनकी टीम के लोग मिल कर रिटेलर्स से संपर्क करके उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाते हैं। सान्या के मुताबिक तकरीबन 20 किसानों को वे ट्रेनिंग दे चुके हैं। साथ ही किसानों को कम कीमत में मधुमक्खी बॉक्स उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा खादी बोर्ड से संपर्क किया है। 
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छात्रों को कोई गंभीरता से नहीं लेता

- फोटो : Amar Ujala
वहीं इन छात्रों को प्रोजेक्ट में कई परेशानियों से भी जूझना पड़ता है। सान्या ने बताया कि कॉलेज स्तर पर और अनैक्टस सोसाइटी बहुत ज्यादा आर्थिक मदद नहीं करती। इसके लिए उन्हें अपने स्तर पर ही रास्ते निकालने होते हैं। इसके लिए सरकारी विभागों से संपर्क करना आसान नहीं होता। छात्र होने के चलते कोई उन्हें गंभीरता से नहीं लेता।

साथ ही स्टूडेंट होने नाते उनके परिजन उन्हें ज्यादा दूर तक सफर करने की अनुमति नहीं देते। सान्या का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में अभी तक किसानों को शुरूआत में आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है, जिसके चलते वे ही किसान संपर्क करते हैं, जिनके पास निवेश के लिए पैसे होते हैं।   

सान्या का कहना है कि कॉलेज की अनैक्टस सोसाइटी हर साल ऐसे ही प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए एक टेस्ट का आयोजन करती है और जिसके बाद चुने हुए छात्रों को इसमें काम करने का मौका दिया जाता है। प्रोजेक्ट मिठास को 2015 में शुरू किया गया था और अब यह प्रोजेक्ट अपने तीसरे चरण में है। 
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