डीआरडीओ ने कावेरी इंजन को स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान के लिए विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन कार्यक्रम में देरी के कारण लड़ाकू विमान को अमेरिकी जीई-404 इंजन द्वारा संचालित करना पड़ा। अब कावेरी का रूस में परीक्षण चल रहा है। इसका करीब 25 घंटे का परीक्षण बाकी है। यह स्लॉट रूस के अधिकारियों को देना है।
भारत के लड़ाकू ड्रोन की ताकत बढ़ाने की तैयारी हो रही है। भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कावेरी इंजन तैयार कर लिया है। यह इंजन ड्रोन को शक्ति देगा। इस इंजन का डीआरडीओ रूस में परीक्षण कर रहा है।
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रक्षा अधिकारियों ने बताया कि कावेरी का रूस में परीक्षण चल रहा है। इसका करीब 25 घंटे का परीक्षण बाकी है। यह स्लॉट रूस के अधिकारियों को देना है। इस इंजन का उपयोग स्वदेशी यूएवी परियोजना को शक्ति प्रदान करने के लिए किए जाने की योजना है। रक्षा अफसरों ने बताया कि कावेरी इंजन को एलसीए विमान में लगाने और इसकी क्षमता का प्रदर्शन करने की योजना बनाई गई है। डीआरडीओ पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के मार्क 2 संस्करण समेत भविष्य के विमानों के लिए अधिक शक्तिशाली इंजन के विकास और निर्माण के लिए एक विदेशी फर्म के साथ काम कर रहा है।
डीआरडीओ ने कावेरी इंजन को स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान के लिए विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन कार्यक्रम में देरी के कारण लड़ाकू विमान को अमेरिकी जीई-404 इंजन द्वारा संचालित करना पड़ा। जीई-404 का उपयोग 32 एलसीए मार्क 1 और ट्विन सीटर ट्रेनर संस्करणों को शक्ति प्रदान करने के लिए किया गया है। 83 एलसीए मार्क 1ए को भी जीई-404 द्वारा संचालित किया जाना है, लेकिन अमेरिकी फर्म के आपूर्ति में समस्याओं करने से योजना में देरी हो गई।
भारत रक्षा उपकरणों की तकनीक के लिए फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की कई कंपनियों से बात कर रहा है। इस संबंध में निकट भविष्य में कई निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। लड़ाकू विमानों के लिए भारतीय स्वदेशी कार्यक्रम का उद्देश्य आयात में कटौती करना और वायुसेना के लिए स्वदेशी प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है।