चुनावों में कांग्रेस के प्रोफेशनल मैनेजर की स्ट्रेटजी यूपी में बुरी तरह फेल रही। एक लाइन में कहा जाए तो उन्होंने कांग्रेस को खाट से उठाकर साइकिल में तो बिठाया लेकिन चुनावी पहिया उल्टा घूम गया। तीन राज्यों के नतीजों को लेकर प्रशांत किशोर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीत में भूमिका निभाने वाले पीके कांग्रेस को वो मुकाम नहीं दिला सके जिसकी अपेक्षा कांग्रेस पार्टी उनसे कर रही होगी। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद राहुल गांधी ने उन पर पूरा भरोसा किया। प्रशांत को पहले यूपी का जिम्मा दिया गया था लेकिन उनके कामकाज से प्रभावित होकर पंजाब और उत्तराखंड भी सौंप दिया गया।
नतीजों की दृष्टि से पंजाब में ही पार्टी को सफलता मिली है। पंजाब में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कैप्टन अमरिंदर सिंह जीत का क्रेडिट कतई प्रशांत की टीम को नहीं देंगे। चुनाव के शुरूआत में कैप्टन ने प्रशांत के हिसाब से तय कार्यक्रमों से इनकार भी कर दिया था। कैप्टन किसी भी कीमत पर हस्तक्षेप नहीं चाहते थे। हालांकि बाद में राहुल के हस्तक्षेप के बाद कैप्टन तैयार हुए।