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रामदेव पर लालू ने क्यों मारी पलटी, कभी कहा था 'पगलेट', अब मिल गए गले?

Thu, 05 May 2016 04:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कहते हैं राजनीति में कोई किसी का दुश्मन नहीं होता तो किसी का सगा भी नहीं। लेकिन बाबा रामदेव और लालू यादव की यह तस्वीर कुछ और ही मायने बयां कर रही हैं, क्योंकि छह महीने पहले तक किसी ने इस नजारे की कल्पना नहीं की होगी। 
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यूं तो सीधे तौर पर योग गुरु बाबा रामदेव का राजनीति से कोई साबका नहीं है लेकिन दाएं बाएं राजनीति में उनकी दखल पूरी है। और यही बात कुछ नेताओं को खटकती भी है, लालू यादव भी उनमें से एक थे। 

कांग्रेस के दिग्विजय सिंह तो खुलकर रामदेव पर हमला करते ही हैं लालू यादव भी जब तब उन पर कटाक्ष करने से नहीं चूकते थे। कुछ साल पहले जब रामदेव ने सांसदों को डकैत और हत्यारा कहा था तो इस पर भड़के लालू यादव ने कहा रामदेव पगला गए हैं, जो भी इस तरह की बात करता है वो पगलेट से कम नहीं है। 
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छह महीने पहले जब बिहार में चुनाव हो रहे थे तो लालू के बीफ पर दिए एक बयान पर रामदेव ने उन्हें कंस का वंशज तक कह डाला था। इस पर लालू ने फिर करारा हमला करते हुए कहा था कि बाबा योगी नहीं भोगी हैं। उन्हें अपने व्यापार पर ध्यान देना चाहिए। 

लेकिन बुधवार को जब बाबा रामदेव अपने उत्पादों का पुलिंदा लेकर लालू यादव के घर पहुंचे तो हर कोई हैरत में रह गया। जिस गर्मजोशी से लालू यादव घर आए रामदेव से मिले उसने हर किसी के माथे पर सलवटें डाल दीं। 
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रामदेव को लेकर अचानक क्यों हुआ लालू का हृदय परिवर्तन

रामदेव ने पूरी मीडिया के सामने लालू के गालों पर कुछ इस अंदाज में गोल्ड क्रीम लगाई मानों दो पुराने दोस्त सालों बाद होली के मौके पर एक दूसरे से मिल रहे हों। राजनीतिक गलियारों में लगातार इस मिलन के निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। 

रामदेव के बारे में तो यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि वह अब पूरी तरह व्यवसायिक रंग में रंग गए हैं। हजारों करोड़ के पतंजलि ब्रांड को मजबूती से स्‍थापित करने के लिए वह किसी राजनीतिक दल या नेता से दुश्मनी मोल लेने का जोखिम नहीं ले सकते। 

लेकिन लालू को लेकर हर किसी का सवाल यही है रामदेव क्यों? यह बात हर किसी को मथ रही है कि जिस रामदेव से लालू इतने गर्मजोशी से गले मिले उन्‍हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कट्टर समर्थक माना जाता है, और लालू अगर राजनीति में किसी को सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं तो वो भी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ही हैं। 

ऐसे में यह बेमेल मिलन हर किसी के ‌पेट में अपच किए हुए है, कि आखिर ऐसी क्या वजह हुई जो लालू यादव के दिल में रामदेव के लिए प्रेम उमड़ आया। लालू यादव को नजदीक से जानने वाले और उनकी राजनीति को समझने वाले यह बात तो अच्छी तरह जानते हैं कि लालू यादव कोई काम बिना वजह नहीं करते। 

फिर चाहे वो अपने धुर विरोधी नीतीश कुमार से दोस्‍ती हो या अपनी डूबती पार्टी को बचाने के लिए मुलायम सिंह के साथ मिलकर महाविलय का खाका तैयार करना। राजनीति के घाघ खिलाड़ी लालू यादव के अचानक हुए इस हृदय परिवर्तन के असली निहितार्थ भी जल्द ही सामने आ जाएंगे लेकिन तब तक सबको इंतजार करना होगा लालू के अगले कदम का।
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