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दास्तान-ए-यूपी पुलिस: या तो पिटेंगे या फिर सीधे गोली चलाएंगे!

Sun, 05 Jun 2016 02:15 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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क्राउड कंट्रोल में तो यूपी पुलिस पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। अगर कहीं भारी भीड़ से इनका सामना हो जाए तो हाथ-पांव फूल जाते हैं। भीड़ के आगे पूरी तरह से सरेंडर कर देती है। या सीधे गोली से बात करती है। जवाहर बाग में भी बिलकुल यही हुआ। 
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भीड़ को कंट्रोल करने के तमाम संसाधन इस समय फोर्स के पास मौजूद हैं। गैस के गोले हैं। मिर्ची बम हैं। पानी की बौछार करने का उपाय है। लाठीचार्ज भी किया जा सकता है। लेकिन पुलिस इसके लिए तैयार ही नहीं हो पाती है। जबकि ट्रेनिंग के दौरान भीड़ नियंत्रण का अपना एक पूरा चैप्टर होता है। लगता है कि पुलिस वाले इसी चैप्टर पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। 
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि भीड़ कंट्रोल करने के लिए पुलिस को लगातार प्रशिक्षण दिलाया जाता है मगर वह उस तरह से कार्रवाई कर नहीं पाते हैं। ऐसा नहीं है कि गोली से ही भीड़ को कंट्रोल किया जाता है। तमाम व्यवस्थाएं हैं। लाठीचार्ज भी तब किया जाता है जब लगे कि भीड़ पूरी तरह से अनियंत्रित हो रही है।
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पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि साधन कई हैं। वज्र वाहन, बाडी प्रोटेक्टर, रबर बुलेट हैं। बुलेट प्रूफ गाड़ियां हैं। जब भी अनियंत्रित भीड़ में पुलिस प्रवेश करे तब इन संसाधनों का होना जरूरी है। यह उन्हें तय करना होता है कि कौन सा संसाधन कब प्रयोग किया जाएगा। फायरिंग भी भीड़ को डराने के लिए की जाती है। गोली पैर में मारी जाती है। हाथ में मारी जाती है। ऐसी जगह गोली मारी जाती है जहां गोली लगने से किसी को कोई नुकसान न हो। फायरिंग का मतलब भी यह नहीं होता कि सीधे गोली चला दो। पूर्व डीजीपी ने स्वीकार किया कि इस समय पुलिस भीड़ कंट्रोल करने में फेल हो रही है।
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लूट लिए थे पुलिस अफसरों के मोबाइल-वायरलेस सेट

फाइल फोटो - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
जवाहर बाग खाली कराने की कार्रवाई में कब्जाधारियों ने सिर्फ पुलिस पर गोलियां और लाठियां ही नहीं चलाईं, घायल पुलिसकर्मियों से लूटपाट भी की थी। हमलावर एसपी देहात के हमराह को घायल कर उनसे वायरलेस सेट और पीएसी के जवानों को लाठी-डंडों से पीटकर उनसे मोबाइल फोन लूट ले गए।

दो जून की शाम पांच बजे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसपी देहात अरुण कुमार के नेतृत्व में बनी दो टीम जेसीबी से बाउंड्रीवाल तोड़कर जवाहर बाग में प्रवेश कर गई थीं। दोनों अधिकारी पीएसी, तीन थानाध्यक्ष और दो सीओ के साथ जवाहर बाग में प्रवेश कर गए थे। इसमें बाईं ओर के इलाके में एसपी देहात थे और दाएं इलाके में एसपी सिटी कमांड करते हुए आगे चल रहे थे। फोर्स मंद कदमों से आगे बढ़ रहा था। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के सिर में प्रहार कर गंभीर घायल कर देने के बाद कुछ हमलावर पेड़ों पर चढ़ गए और कुछ ने एसपी देहात वाली टुकड़ी पर हमला कर दिया था।

उस दौरान एसपी देहात ने अपना वायरलेस सेट अपने हमराह वीर विक्रम को दे रखा था। हमलावरों ने वीर विक्रम को घेर लिया ओर उसकी पिटाई कर घायल कर दिया और उनसे वायरलेस सेट लूटकर ले गए। पीएसी के आठ जवानों को भी लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया और उनसे मोबाइल फोन छीन लिए।

एसओ फरह के दोनों मोबाइल गायब
मथुरा। जवाहर बाग में शहीद हुए एसओ फरह संतोष यादव के फरह थाने का सीयूजी नंबर और अपने व्यक्तिगत नंबर वाला मोबाइल फोन दोनों ही घटना के बाद से गायब हैं। उनके शहीद होने के बाद उनके परिवारीजनों को सूचना देने के लिए पुलिस के पास कोई मोबाइल नंबर नहीं था। संतोष यादव के मोबाइल भी नहीं मिले। बाद में उनके रिश्तेदार राजकेशर यादव की मदद से रात नौ बजे परिवारीजनों से संपर्क किया जा सका। (मथुरा से दिनेश शर्मा की रिपोर्ट)
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