एक जहाज तूफान में फंसा हुआ था। कई लोग सबकी आंखों के सामने तूफान में डूब गए। कई दूसरे लोगों के डूब जाने का खतरा था। जहाज में बैठे लोग, जहाज के छोटे-बड़े कर्मी सब जहाज को डूबने से बचाने में लगे थे। बहुत ही भयावह स्थिति थी, फिर भी लोग साथ देकर एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाते रहे।
सबको ये भरोसा था कि जहाज का कैप्टन भी जहाज को बचाने का भरसक प्रयास कर रहा होगा। जब स्थिति ज्यादा बिगड़ने लगी तो लोगों ने जहाज के कैप्टन से अपील की। लेकिन लोग हतप्रभ रह गए, जब उन्हें पता चला कि जहाज का कैप्टन तो गायब है। तमाम चीख-पुकारों, अपीलों को वो अनसुना करते हुए वह जिम्मेदारी की कुर्सी से उठकर कहीं चला गया था।
प्रियंका गांधी ने अपनी कहानी में आगे लिखा कि जहाज पर जो लोग मौजूद थे, उन्होंने बचाव कार्य शुरू कर दिया। छोटे-बड़े कर्मियों ने आशा नहीं छोड़ी। कई लोगों ने अपने साथी खो दिए, कई लोगों के सामने उनके अपने डूब गए। प्रियंका ने कहानी में आगे लिखा कि जहाज पर मौजूद यात्रियों को जब यह मालूम हुआ कि कैप्टन को पहले से ही खराब मौसम और विपरित परिस्थितियों की जानकारी थी, वे बहुत दुखी हुए।
कैप्टन यह भी जानता था कि ऐसे में जहाज डूब भी सकता है। हैरानी की बात ये रही कि जहाज के कैप्टन ने ना तो लोगों को समय पर आगाह किया, ना ही लोगों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया। इतना ही नहीं, कैप्टन ने जहाज का सुरक्षा का कवच भी नहीं बढ़ाया। जहाज के कैप्टन ने लोगों की सुरक्षा से जुड़ी कई आवश्यक चीजें दूसरे जहाजों को दे दीं।
जहाज पर लंबे समय तक ये मार्मिक दृश्य चलता रहा। लोगों एवं कर्मियों की मेहनत के बाद स्थिति कुछ नियंत्रण में आई। स्थिति नियंत्रण में आने के थोड़ी ही देर बाद अचानक कैप्टन की आवाज जहाज भर में गूंज उठी, एक के बाद एक लाउडस्पीकर पर उसकी घोषणाएं आने लगीं। एक दिन तो उसकी आवाज अटकी और वह रोने भी लगा।
जहाज पर फंसे हुए लोग अभी भी त्रस्त थे, कैप्टन की आवाज उन्हें सुनाई तो दे रही थी मगर कुछ दूर। वह आवाज अब उन्हें कुछ अलग सी लगने लगी थी। सब एक दूसरे की मदद में व्यस्त थे। बहुत से लोगों को अभी भी बचाना था। सबका ध्यान इन्हीं कार्यों में लगा था। किसी को पता तक नहीं लगा कि कैप्टन चुपचाप से बाहर आकर फिर से अपनी सीट पर बैठ गया था।
बता दें कि राहुल गांधी, शिवसेना के नेता, अरविंद केजरीवाल और दूसरे कई मुख्यमंत्री केंद्र सरकार पर कोरोना काल में उठी विभिन्न समस्याओं को लेकर निशाना साधते रहे हैं। फिर चाहे वो ऑक्सीजन की किल्लत हो या वैक्सीन को विदेशों में भेजने का मुद्दा। खास बात यह है कि प्रियंका गांधी की ओर से साझा की गई है कहानी के अधिकांश शब्द वही हैं जो केंद्र सरकार और कोरोना से जंग में रोजाना पढ़ने-सुनने को मिल रहे हैं।