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2018 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हुईं नादिया मुराद, दर्दभरी है उनकी ये कहानी

Sat, 06 Oct 2018 01:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नादिया मुराद को 2018 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनके अलावा ये पुरस्कार डेनिस मुकवेगे को भी दिया गया है। चलिए जानते हैं कि इन दोनों के बारे में-
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डेनिस और नादिया को ये पुरस्कार यौन हिंसा के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए दिया गया है।
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इराक की रहने वाली नादिया एक यजीदी हैं और डेनिस अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के रहने वाले हैं।

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नादिया की कहानी बेहद दर्दभरी रही है। अभी भले ही वह यौन हिंसा के प्रति जागरुकता फैला रही हैं लेकिन इससे पहले वह खुद बहुत कुछ झेल चुकी हैं।
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नादिया को साल 2014 में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आंतकवादियों ने गिरफ्तार कर लिया था। वहां उनके साथ दिन रात रेप किया गया। नादिया को सेक्स स्लेव बना दिया गया था।
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25 साल की नादिया करीब 3 महीने तक आतंकवादियों के कब्जे में रहीं। वह उन्हीं 3 हजार यजीदी महिलाओं और लड़कियों में से एक थीं जिनका आईएस के आतंकवादियों ने दिन रात बलात्कार किया।
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उस तीन महीने के दौरान नादिया को कई बार खरीदा और बेचा गया। उनका यौन और शारीरिक शोषण हुआ। शांति का नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति के अनुसार इस बार 216 व्यक्तियों और 115 संगठनों को नामित किया गया था। 

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प्रति वर्ष यह पुरस्कार उस शख्स या व्यक्ति को दिया जाता है जिसने विश्व शांति में अपना योगदान दिया हो या शांति के लिए कोशिश की हो। इस साल इस पुरस्कार के लिए कुल 331 लोग नामित किए गए थे। जो नामांकित व्यक्तियों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। जिसे शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाता है उसके नाम को गुप्त रखा जाता है।

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नामांकित किए व्यक्तियों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन और पोप फ्रांसिस जैसी शख्सियतों का भी नाम शामिल था।

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शांति पुरस्कार देने वाली संस्था ने ट्वीट कर कहा, 2018 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुक्वेगे ने युद्ध के समय यौन हिंसा के पीड़ितों की रक्षा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनकी साथी नादिया मुराद को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिसने खुद और दूसरों के खिलाफ दुर्व्यवहार के बारे में जिक्र किया है।'

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नादिया मुराद बसी ताहा का जन्म इराक के कोजो में 1993 में हुआ था। वह इराक की यजीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वह नादिया अभियान की संस्थापक हैं। यह संस्था उन महिलाओं और बच्चों की मदद करती है जो नरसंहार, सामूहिक अत्याचार और मानव तस्करी के पीड़ित होते हैं। संस्था उन्हें अपनी जिंदगी दोबारा जीने और उन बुरी यादों से उबरने में मदद करती है। 

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1 मार्च 1955 को जन्मे डेनिस पेशे से गायनोकोलोजिस्ट हैं। 9 भाई-बहनों में वह तीसरे नंबर के हैं। उन्होंने बुकावू के पनजी अस्पताल में काफी काम किया है। यहां वह उन महिलाओं का इलाज करते थे जिनके साथ सुरक्षाबलों ने बलात्कार या समूहिक दुष्कर्म किया होता था।

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दूसरे कांगों युद्ध के बाद उन्होंने ऐसी हजारों पीड़िताओं का इलाज किया है। वह 18 घंटे के दौरान लगभग 10 पीड़िताओं की सर्जरी किया करते थे। द ग्लोब एंड मॉल के अनुसार मुक्वेगे बलात्कार की चोटों को ठीक करने के लिए दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञ हैं।

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जानकारी के लिए बता दें नादिया मुराद को मलाला युसूफजई के बाद सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। वह यौन शोषण के लिए जागरुकता तो फैला ही रही हैं साथ ही उन्होंने अपने अुनभवों पर एक किताब भी लिखी है। इस किताब का नाम है 'द लास्ट गर्ल: माई स्टोरी ऑफ कैप्टीविटी, एंड माई फाइट अगेनस्ट द इस्लामिक स्टेट'।
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