त्रिपुरा की रहने वाली दीपा करमाकर ने सालों से ओलंपिक में कोटे के लिए जूझती भारतीय जिम्नास्टिक को नई सांसे दे दी हैं। क्वालिफाइंग राउंड में दमदार प्रदर्शन कर जैसे ही 22 साल की दीपा ने रियो डी जेनेरियो ओलंपिक के लिए जगह पक्की की पूरे देश की निगाह इस अंजान से चेहरे पर आकर ठहर गई।
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deepa karmakar
- फोटो : deepa karmakar
ओलंपिक क्वालिफायर में दमदार प्रदर्शन करने वाली दीपा आज पूरे देश की सुर्खियां बटोर रही हैं लेकिन इस बात की जानकारी कम ही लोगों को होगी की कभी उन्हें इस खेल के लिए रिजेक्ट कर दिया गया था।
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रिजेक्ट करने की वजह थी उनके फ्लैट फुट। जिन्हें देखकर उनके जिम्नास्टिक कोच ने उन्हें किसी और खेल को अपनाने की सलाह दे डाली थी, लेकिन दीपा के पिता इस बात पर अड़ गए कि वह अपनी बेटी को जिम्नास्ट ही बनाएंगे।
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त्रिपुरा की रहने वाली दीपा का जन्म अगरतला में हुआ था। उनके पिता खुद भी साई के कोच थे, इसलिए उन्होंने बेटी को भी खिलाड़ी बनाने का ही सपना देखा। दीपा जब छह साल की थी तब ही उनके पिता उन्हें जिम्नास्टिक सिखाने के लिए एक कोच के पास ले गए।
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पिता चाहते थे कि बेटी जिम्नास्ट बने, लेकिन कोच ने दीपा के फ्लैट फुट देखकर उसे दूसरे खेलों में जाने की सलाह दी। असल में जिम्नास्टिक जैसे फुर्ती के खेल में फ्लैट फुट को अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इसकी वजह से जंप मारने में दिक्कत आती है।
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कोच की बात सुनकर दीपा ने भी हार मान ली, लेकिन उसके पिता नहीं माने और उसे जिम्नास्ट बनाने की जिद ठान ली। दीपा ने भी पिता की इच्छा पूरी करने के लिए छोटी उम्र से ही कड़ी मेहनत शुरू कर दी। उनकी मेहनत रंग लाई और जल्द ही उन्होंने कामयाबियों की फेहरिस्त लिखनी शुरू कर दी।
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दीपा सबसे पहले चर्चा में तब आई जब उन्होंने ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता। भारत में जिम्नास्ट जैसे पिछड़े खेल में पदक जीतना बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद उन्होंने पिछले साल नवंबर में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि उन्हें कोई पदक तो नहीं मिला लेकिन फाइनल तक पहुंचकर उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर जरूर खींचा।
दीपा जिम्नास्ट के जिस इवेंट प्रोडुनोवा में शिरकत करती हैं उसे काफी मुश्किल माना जाता है। दीपा की उपब्धि इसलिए भी बड़ी हो जाती है कि जिम्नास्टिक जैसी कठिन स्पर्धा में भारतीय पुरुष भी विदेशी खिलाड़ियों का मुकाबला नहीं कर पाते। इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि 60 के दशक के बाद भारत का कोई भी खिलाड़ी ओलंपिक जिम्नास्टिक में शिरकत नहीं कर पाया है।