सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते हाईवे के किनारे शराब बिक्री पर रोक लगा दी। हालांकि यह रोक 2017 से प्रभावी होगी। इसके पीछे शराब ठेकों को मिले तय समय सीमा के लाइसेंस हैं, जिनकी मियाद 2017 में खत्म होगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले कि पीछे वजह क्या है और कौन है वह शख्स जिसने वर्षो तक इस फैसले के लिए दिन-रात एक कर दिया?
बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं है कि हाईवे किनारे शराबबंदी का सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हर सिंह सिद्धू नाम के शख्स की हादसे के बाद बदली जिंदगी का परिणाम है। सिद्धू ने ही अदालत में हाईवे किनारे शराबबंदी के खिलाफ जनहित याचिका डाली थी। सिद्धू ने ऐसा नहीं किया होता, अगर वे 20 साल पहले उस दर्दनाक हादसे का शिकार न हुए होते। बात 1996 के अक्टूबर माह की है। सिद्धू अपने तीस दोस्तों के समूह में हिमाचल के रेणुका इलाके से चंडीगढ़ के लिए कार से जा रहे थे।
रास्ते में जंगलों से गुजरते हुए सिद्धू को जंगली जानवरों को देखने की ललक हुई और उन्होंने हाईवे के किनारे की कच्ची सड़क पर गाड़ी उतार दी। कच्ची सड़क पर गाड़ी फिसल गई और 60-70 फुट नीचे खाई में जा गिरी। गाड़ी में सवार सिद्दू के दोस्त तो बच गए लेकिन उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी। इसकी वजह से सिद्धू की गर्दन के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। जिस वक्त उनके साथ यह हादसा हुआ, उनकी उम्र 26 वर्ष थी। तब से सिद्धू व्हीलचेयर पर गुजर-बसर कर रहे हैं। इस हादसे ने सिद्धू को सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी जानकारियां जुटाने के लिए प्रेरित किया।