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धार्मिक सद्भाव के लिए मीट बिक्री रोकना असंवैधानिक नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

Thu, 05 Sep 2019 04:59 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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Bombay high court - फोटो : Social Media (File Photo)
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि समाज के एक खास वर्ग की भावनाओं को ध्यान में रखकर धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए मीट बिक्री की दुकानों और बूचड़खानों पर अल्पकालीन बंदी का आदेश असंवैधानिक नहीं है। चीफ जस्टिस प्रदीप नांद्राजोग और जस्टिस भारती डांगरे ने बांबे मटन डीलर्स एसोसिएशन और एक अन्य व्यक्ति की तरफ से इसके खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल राहत देने से इंकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिका को खारिज नहीं करते हुए बाद में निर्णायक सुनवाई करने की बात कही है।

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याचिकाकर्ताओं ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और मीरा भयंदर नगर निगम के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दोनों नगर निगम ने सितंबर, 2015 में जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व के दौरान जानवरों के कटान और मांस की बिक्री करने पर रोक लगाई थी। यह पर्व हर साल चार से दस दिन तक अगस्त-सितंबर माह में मनाया जाता है। नगर निगमों ने यह आदेश हर साल के लिए लागू कर दिया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दुकानों को बंद करने का आदेश संविधान में दिए रोजगार के मूलभूत अधिकार का हनन है। इसी आधार पर उन्होंने इस आदेश को स्थगित करने का आग्रह हाईकोर्ट से किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अहमदाबाद नगर निगम से जुड़े एक ऐसे ही मामले में दिए गए आदेश का हवाला देकर इस याचिका को खारिज कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने दुकानों को अल्पकाल के लिए बंद कराए जाने को असंवैधानिक नहीं माना था। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर अपना आदेश सुनाते हुए कहा, हमारी राय में समाज के एक खास वर्ग की भावनाओं को ध्यान में रखकर यदि बूचड़खानों और मीट बिक्री की दुकानों को अल्पकाल के लिए बंद रखा जाता है, तो यह असंवैधानिक नहीं है।

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