इस सप्ताह भारत और चीन के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के सैन्य कमांडर फिर चर्चा करेंगे। पिछली चर्चा 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीन के मेजर जनरल लियु लिन के बीच में हुई थी।
पूर्व विदेश सचिव शशांक ने इसे अच्छी प्रगति बताया है। शशांक का कहना है कि चीन की सेना के पीछे हटने के संकेत से साफ है कि भारत और चीन समाधान की दिशा में बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिखर नेताओं के बीच में अच्छा सामंजस्य है। वुहान में और महाबलिपुरम में अनौपचारिक बातचीत होना इसका साफ संकेत हैं। यह विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम माना जाता है।
पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चीन के कोविड-19 संक्रमण से ग्रस्त रहने के दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले दस टन चिकित्सा सामग्री भेजने का निर्णय लिया था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की थी।