बंगलूरू के कुम्बरहल्ली में 22 जून को कुछ लोगों ने बकरियों और भड़ों को चुरा लिया और इन्हें आंध्र प्रदेश ले जाया गया, लेकिन पुलिस ने इस चोरों को मात्र 48 घंटे में पकड़कर हवालात में डाल दिया। हुआ कुछ ऐसा कि 22 जून की आधी रात को, तीन लोग, जो एक मिनी माल वाहन के साथ शराब की तलाश कर रहे थे, वह एक आदमी के पास पहुंचे, जो तुमकुरु रोड से दूर सोलदेवनहल्ली के कुम्बरहल्ली में अपने घर के बाहर खड़ा था। उन लोगों ने उस आदमी से पूछा कि क्या वह उन्हें शराब दिलाने में मदद कर सकता है।
रवि ने कहा कि वह शराब नहीं पीते हैं और उन्हें पता नहीं है कि इस समय शराब कहां मिल सकती है। उन लोगों ने बार-बार रवि से उनकी मदद करने के लिए कहा, यह कहते हुए कि वे आंध्र प्रदेश से काम पर आए थे और उसी रात उन्हें वापस जाना पड़ रहा है और उन्हें शराब की सख्त जरूरत है। हालांकि, इतना कहने पर भी रवि ने कहा कि वह उनकी मदद नहीं कर सकता।
इस बीच, 23 जून को, कुम्बरहल्ली निवासी 54 वर्षीय नंदकुमार ने सोलदेवनहल्ली पुलिस स्टेशन में पांच भेड़ और 20 बकरियों के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई और साथ ही उन्होंने इस काम के पीछे उनके यहां काम करने वाले डी राजू पर संदेह होने की बात कही।
राजू ने नंदकुमार के साथ एक साल तक सहायक के रूप में काम किया। 2 जून को, वह आंध्र प्रदेश में अपने गृहनगर, धर्मावरम के लिए रवाना हुआ था और उसने कहा था कि उसके एक रिश्तेदार की दुर्घटना हो गई थी और वह उसकी देखभाल करने के लिए जा रहा है। राजू की पत्नी और बच्चे भी उसके साथ चले गए थे।
बकरियों के असली मालिक नंदकुमार ने बताया कि 22 जून को राजू अकेला लौटा और मुझसे कहा कि उसका परिवार एक दो दिनों में वापस आ जाएगा। उस रात, उन्होंने शेड को बंद कर दिया और अंदर छह भेड़ और 39 बकरियां थीं।
अगले दिन, जब लगभग 6.30 बजे शेड खोला तो उसमें केवल पांच भेड़ और 20 बकरियों को गायब पाया। इसके बाद नंदकुमार ने तुरंत राजू को फोन किया, लेकिन उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ था। उसका कमरा भी खाली था।
पुलिस ने इलाके के लोगों से पूछताछ शुरू की और फिर पुलिस उस आदमी के पास पहुंची जिसको उन चोरों ने शराब के लिए परेशान किया था। उस आदमी ने बताया कि वह लोग मिनी ट्रक में घूम रहे थे और सभी आंध्र प्रदेश के थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में उस मिनी ट्रक की तलाश की कि वह कौन सी दिशा में जा रहा है। उसको लगातार ट्रैस किया गया, और उन सभी को आंध्र प्रदेश में जाकर पकड़ लिया और मात्र 48 घंटों में बकरियों को असली मालिक तक पहुंचा दिया।