फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लैफ्टीनेंट जनरल को डिमोट करने के न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक

Tue, 31 May 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
supreme court of india
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण(एएफटी) के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें लेफ्टीनेंट जनरल रैंक के एक अधिकारी एनके मेहता को पदावनति कर बिग्रेडियर बना दिया गया था। इस वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर कथित तौर पर साक्ष्यों को गलत तरीके से पेश करने के आरोप हैं। इस मामले में एएफटी ने रक्षा मंत्रालय और सेना पर भारी जुर्माना भी लगाया था। 
विज्ञापन


एएफटी के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की इस याचिका पर न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने नोटिस भी जारी किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ ने कहा एएफटी का आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए, नहीं तो इससे अव्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण को इस तरह का आदेश नहीं पारित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लेफ्टीनेंट जनरल को बिग्रेडियर बना दिया जाएगा तो सेना किस तरह से काम करेगी। 
विज्ञापन

ब्रिगेडियर से मेजर जनरल बनाया जाना उचित नहीं

भारतीय सेना - फोटो : Getty
अटॉर्नी जनरल ने यह भी कि न्यायाधिकरण के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाले मेजर जनरल आरएस राठौड़ ने मेजर जनरल एन के मेहता को लेफ्टीनेंट जनरल बनाए जाने को चुनौती नहीं दी थी बल्कि उन्होंने बिग्रेडियर से मेजर जनरल बनाए जाने को चुनौती दी और वह भी तीन वर्षों के बाद। वहीं राठौड़ की ओर से पेश वकील एश्वर्या भाटी ने कहा कि अगर एएफटी के आदेश पर रोक उचित नहीं होगा। 

मालूम हो कि गत 13 मई को एएफटी ने लेफ्टीनेंट जनरल एनके मेहता को डिमोट पर दो पद नीचे ब्रिगेडियर बना दिया था। एनके मेहता को कुछ ही महीने पहले लेफ्टीनेंट जनरल बनाया गया था। साथ ही एएफटी ने रक्षा मंत्रालय और सेना पर 50 लाख और अधिकारी पर पांच लाख जुर्माना किया था। एएफटी ने पाया कि न्यायाधिकरण के पूर्व आदेश के आधार पर लेफ्टीनेंट जनरल मेहता को ब्रिगेडियर से मेजर जनरल बनाया जाना उचित नहीं था क्योंकि साक्ष्यों को छिपाया गया था। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें