सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण(एएफटी) के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें लेफ्टीनेंट जनरल रैंक के एक अधिकारी एनके मेहता को पदावनति कर बिग्रेडियर बना दिया गया था। इस वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर कथित तौर पर साक्ष्यों को गलत तरीके से पेश करने के आरोप हैं। इस मामले में एएफटी ने रक्षा मंत्रालय और सेना पर भारी जुर्माना भी लगाया था।
एएफटी के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की इस याचिका पर न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने नोटिस भी जारी किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ ने कहा एएफटी का आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए, नहीं तो इससे अव्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण को इस तरह का आदेश नहीं पारित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लेफ्टीनेंट जनरल को बिग्रेडियर बना दिया जाएगा तो सेना किस तरह से काम करेगी।