1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री
अरुण जेटली ने दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बजट पेश किया था। जिसके तहत 50 करोड़ गरीब परिवारों को
स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा। इस बजट की जहां काफी तारीफ हुई वहीं यह सवाल भी उठा था कि इसमें राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की कितने प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (एनएचपीएस) या मोदीकेयर के अंतर्गत आने वाले घरों को 5 लाख का बीमा कवर दिया जाएगा।
बीमा में 433 रुपए राज्य सरकारें देगी जबकि बाकी की बची हुई राशि केंद्र देगा। इस बीमा में प्रति व्यक्ति प्रति परिवार के हिसाब से सालाना 1,082 रुपए का प्रीमियम भरा जाएगा। इस बारे में सूत्र ने बताया कि यह अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि इससे 10 करोड़ परिवार एक बार में ही लाभान्वित होंगे। राज्य के शेयर को देखा जाए तो 10 करोड़ परिवार के हिसाब से उनपर 4,330 करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से इस मामले में विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया है। ई-मेल्स भेजी जा चुकी हैं और अलग-अलग राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू हो गई है। सूत्रों का कहना है कि एनएचपीएस गणना राज्य और केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के डाटा पर आधारित हैं। फिलहाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लगभग 3.8 करोड़ लोग लाभार्थी हैं जिनपर सरकारें प्रति परिवार के हिसाब से 500 रुपए खर्च करती है।