कांग्रेस ने रविवार को कहा कि वह नियुक्तियों और पदोन्नतियों में आरक्षण के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से असहमत है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकार खतरे में है। कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाएगी।
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उपलब्ध कराए बगैर सार्वजनिक सेवाओं में सभी पदों को भरे जाने का फैसला लिया गया था। वासनिक ने कहा, ‘हम सम्मानपूर्वक कहते हैं कि हम इस निर्णय से सहमत नहीं हैं... भाजपा सरकार में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकार सुरक्षित नहीं है।’
उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी का मानना है कि सरकारी पदों पर एससी/एसटी समुदाय के लोगों की नियुक्ति सरकारों के विवेकाधिकार पर नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार है। संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज भी मौजूद थे। उदित राज ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह विषय भाजपा नीत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विरोधाभास को प्रदर्शित करता है क्योंकि केंद्र ने इसी तरह के मामले में पदोन्नति में आरक्षण का समर्थन किया था। भगवा पार्टी पर निशाना साधते हुए दलित नेता ने कहा, भाजपा बुनियादी तौर पर दलितों और आरक्षण के खिलाफ है।
न्यायालय के आदेश के मद्देनजर पुनर्विचार याचिका दायर करे केंद्र: खड़गे
ग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को कहा कि आरक्षण के संबंध में उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश के मद्देनजर केंद्र सरकार या तो पुनर्विचार याचिका दायर करे, या फिर आरक्षण को मूल अधिकार बनाने के लिए संविधान में संशोधन करे। खड़गे ने कहा, कम से कम अब भारत सरकार को जागना चाहिए। वे या तो विधि विभाग से सलाह करके संविधान के अनुच्छेद 16 (4) (बी) और (सी) में संशोधन कर सकते हैं या फिर पुनर्विचार याचिका दायर कर मामले की सुनवाई संविधान पीठ द्वारा कराए जाने का अनुरोध कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाएगी। कांग्रेस नेता का दावा है कि संविधान से जुड़े इस मामले की सुनवाई दो सदस्यीय पीठ द्वारा नहीं की जानी चाहिए थी। इसकी सुनवाई पूर्ण (संविधान) पीठ द्वारा की जानी चाहिए थी।