केंद्रीय चुनाव आयोग के दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) द्वारा
ईवीएम की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी आदेश पर राज्य चुनाव आयोगों ने आपत्ति जताई है। इसका खुलासा राज्य चुनाव आयोग की हाल ही में हुई एक कॉन्फ्रेंस पर
आरटीआई से हासिल विवरण से हुई। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के चुनाव आयुक्त शामिल हुए थे। कॉन्फ्रेंस में शामिल आयुक्तों ने केंद्रीय चुनाव आयोग के सर्कुलर पर गंभीर चिंता जताई। इसमें कहा गया है कि अलग-अलग डिजाइन की ईवीएम के इस्तेमाल और इसकी विश्वसनीयता को लेकर मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच भी भ्रम उत्पन्न होगा।
26 मई 2017 को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि चुनाव आयोग की ईवीएम डिजाइन को किसी अन्य को ईवीएम की बिक्री के लिए उपयोग न किया जाए। इस डिजाइन को तकनीकी विशेषज्ञ समिति/आयोग द्वारा मंजूरी मिली है। इसमें कहा गया है कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राज्य चुनाव आयोगों और विदेशी चुनाव प्रबंध संस्थाओं सहित अन्यों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) बेचने के लिए अलग डिजाइन तैयार किया जाए।
इस मामले पर 8-9 नवंबर को मध्य प्रदेश के हनुवंतिया में हुई राज्य चुनाव आयुक्तों की बैठक में चर्चा हुई। इस कॉन्फ्रेंस के विवरण की एक कॉपी आरटीआई द्वारा हासिल की गई है। यह आरटीआई भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने दाखिल की थी। विवरण में कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया केंद्रीय और राज्य चुनाव आयोगों दोनों के लिए एक समान है। ऐसे में केंद्रीय चुनाव आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) को मशीनें उसकी इजाजत के बगैर किसी अन्य को नहीं बेचने का निर्देश क्यों दिया है।