Women Reservation: भाजपा शासित कई राज्यों की विधानसभाओं में अगले सप्ताह महिला आरक्षण बिल पर विशेष सत्र के दौरान तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिलेगी, जहां पक्ष-विपक्ष आमने-सामने होंगे। कुछ राज्यों में 27 और 28 अप्रैल को सत्र बुलाए गए हैं, जबकि अन्य जगहों पर भी जल्द सत्र तय किए जा रहे हैं।
भाजपा शासित राज्यों की विधानसभाएं अब अगले हफ्ते से महिला आरक्षण विधेयक पर तीखी बहस की साक्षी बनेंगी। संसद एवं सड़क के बाद विधानसभा में एक-दूसरे को महिला विरोधी बताने की होड़ होगी। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र बुलाए हैं। इसमें भाजपा के निशाने पर विपक्ष और खासकर कांग्रेस रहेगी। महिला आरक्षण में ओबीसी का अलग कोटा देने के मुद्दे पर विपक्ष का खासा जोर होगा।
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हरियाणा विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया गया है। इसी दिन मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र होगा। उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र 28 अप्रैल को हो सकता है। ओडिशा में नेता प्रतिपक्ष ने तो राजनीतिक अधिकार सुरक्षित रखने के साथ महिला आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाने की मांग पहले ही कर रखी है। सत्र की तारीख तय होनी है।
महाराष्ट्र में विशेष सत्र बुलाने का निर्णय जल्द होगा। छत्तीसगढ़ में विधानसभा का विशेष सत्र अगले हफ्ते में होने की उम्मीद है। खास बात है कि इन विधानसभाओं की ओर से महिला आरक्षण की राह में रोड़े अटकाने, महिलाओं के उत्थान में बाधा बनने के आरोप में निंदा प्रस्ताव भी पारित कराया जा सकता है। इसी बीच भाजपा देशभर में जनाक्रोश रैली के जरिये विपक्ष दलों को महिला विरोधी बताने की मुहिम चला रही है।
उत्तर प्रदेश पहले ही बुला चुका महिलाओं के नाम विशेष सत्र
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस साल का दूसरा सत्र 30 अप्रैल को बुलाया है। विधानसभा में महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा के सामने मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी होगी। वैसे यूपी में 22 सितंबर 2022 को महिलाओं के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था। इसमें सिर्फ महिला विधायकों को ही बोलने का मौका मिला था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति की ओर से इस मुद्दे पर एक करोड़ महिलाओं से हस्ताक्षर कराने का अभियान शुरू करने का एलान किया है। इसमें भाजपा के सहयोगी शिवसेना व एनसीपी भी शामिल होंगे।