कोरोना मरीजों का जल्द पता लगाने के लिए एक स्टार्टअप ने कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) आधारित प्लेटफॉर्म ‘एक्स-रे सेतु’ को विकसित किया। इसमें छाती के एक्स-रे के कम रिजोल्यूशन की तस्वीर से भी डॉक्टर बीमारी का पता लगा सकते हैं।
व्हाट्सएप पर भेजे गए एक्स-रे से होती है पहचान
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने बुधवार को बयान जारी कर बताया, बंगलूरू स्थित हेल्थ-टेक स्टार्टअप निरामय और भारतीय विज्ञान संस्थान ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ मिलकर एक्स-रे सेतु बनाया है। स्टार्टअप ने इस सुविधा की मदद से व्हाट्सएप पर भेजी गई छाती की एक्स-रे छवियों से कोरोना संक्रमित रोगियों की पहचान की।
तेजी से मरीजों की पहचान करने में सक्षम
स्टार्टअप के मुताबिक एक्स-रे सेतु तेजी से परिणाम देता है और उपयोग में आसान है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना रोगियों की तेजी से पहचान करने में मदद कर सकता है। यह प्लेटफॉर्म उन डॉक्टरों के लिए मददगार साबित होगा, जिनके पास एक्स-रे मशीन की सुविधा है। एक्स-रे सेतु में प्रभावित इलाकों का विश्लेषण करके उनमें रंगों के जरिये मानचित्र (हीटमैप) की समीक्षा की जाती है। यह समीक्षा डॉक्टरों के लिए उपयोगी है, ताकि वे आसानी से हालात के बारे में जान सकें।
1000 से अधिक कोरोना संक्रमितों की हुई पहचान
इंग्लैंड के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने 1,25,000 से अधिक एक्स-रे तस्वीरों को इस प्रक्रिया से जांचा है। इसी तरह एक्स-रे सेतु से एक हजार से अधिक भारती कोरोना मरीजों की जानकारी हासिल की गई है। इस प्रक्रिया से मिलने वाले आंकड़ों की संवेदनशीलता 98.86 प्रतिशत और सटीकता 74.74 प्रतिशत है।