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प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत रोटावायरस टीके की शुरुआत

Sun, 27 Mar 2016 03:50 AM IST
एजेंसी,ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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देश मे बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार ने शनिवार को सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम(यूआईपी) के तहत रोटा वायरस टीके का शुभारंभ किया। इस टीके की शुरुआत फिलहाल चार राज्यों आंध्र प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में रही है। बाद में इसे अन्य राज्यों में शुरू करने की योजना है। रोटावायरस टीका स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा पीपीपी के तहत देश में ही विकसित किया गया है।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने रोटा वायरस टीके के राष्ट्रीय शुभारंभ करते हुए इसे ऐतिहासिक पल करार दिया। उन्होंने कहा कि  सरकार बच्चों में अस्वस्थता और मृत्यु दर कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत केबच्चों में नियमित प्रतिरक्षण को बेहतर बनाना हमारा उद्देश्य है और इस पहल से देश का स्वस्थ्य भविष्य सुनिश्चित होगा।

नड्डा ने कहा कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रोटा वायरस अतिसार (डायरिया) एवं मृत्यु केसबसे बड़े कारणों में से एक है। देश में प्रति वर्ष करीब एक लाख बच्चों की रोटा वायरस डायरिया केकारण मौत होती है जबकि नौ लाख बच्चे हर वर्ष डायरिया केकारण अस्पताल में भर्ती होते हैं।
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उन्होंने कहा कि इस जीवनरक्षक टीके को प्रतिरक्षण कार्यक्रम में शामिल करने से न सिर्फ बच्चों केस्वास्थ्य में सुधार होगा बल्कि रोटावायरस से पनपने वाली अन्य समस्याएं मसलन, कुपोषण, बच्चों में देरी से होने वाले मानसिक और शारीरिक विकास आदि भी कम होंगी। नड्डा ने बताया कि 1985 में शुरू किया गया भारत का सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम दुनिया केसबसे बड़े प्रतिरक्षण कार्यक्रमों में से एक है।
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रोटा वायरस पर डब्ल्यूएचओ ने की सराहना

- फोटो : Getty Images
भारत में रोटा वायरस टीके की शुरुआत की तारीफ करते हुए डब्ल्यूएचओ ने शनिवार को इसे देश के बच्चों की भलाई के लिए उठाया गया ‘बेहद महत्वपूर्ण’ कदम करार दिया है। डब्ल्यूएचओ की दक्षिण पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने कहा कि भारत का यह फैसला देश के बच्चों की भलाई के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

रोटा वायरस के कारण दुनिया में हर साल पांच साल से कम उम्र के चार लाख 53 हजार बच्चे मारे जाते हैं। यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में हर साल पांच साल से कम उम्र के एक लाख 27 हजार बच्चे रोटा वायरस के कारण मौत के मुंह में चले जाते हैं। इनमें से 98 हजार बच्चे भारत के होते हैं।
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