इन दिनों देश में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर काफी विवाद चल रहा है। इस विवाद में मुकेश अंबानी और भारत सरकार भी चर्चा के केंद्र में हैं। मस्क का आरोप है कि कुछ बड़े उद्योगपति भारत के बाजार में एकधिकार बनाए रखे हैं और स्टारलिंक को आने से रोक रहे हैं। इन सब के बीच उन्होंने मुकेश अंबानी पर तंज कसते हुए उन्हें डियर प्राइम मिनिस्टर भी कहा।
हालांकि, भारत सरकार ने मस्क के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। स्टारलिंक, जियो और वनवेब जैसी कंपनियों को भी सुरक्षा और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
आप अपने मोबाइल से किसी को कॉल करते हैं, इंटरनेट चलाते हैं या टीवी पर कोई कार्यक्रम देखते हैं, तो इन सेवाओं के पीछे रेडियो तरंगों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन्हीं तरंगों के जरिए एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक वायरलेस सिग्नल पहुंचते हैं। इन तरंगों की अलग-अलग फ्रिक्वेंसी के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध दायरे को रेडियो स्पेक्ट्रम कहा जाता है।
इसे आप एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं। सड़क पर अलग-अलग गाड़ियों के चलने के लिए लेन निर्धारित होती हैं। अगर सभी गाड़ियां बिना किसी व्यवस्था के एक ही जगह चलने लगें, तो ट्रैफिक जाम हो सकता है। इसी तरह वायरलेस संचार में अलग-अलग सेवाओं और नेटवर्क को निर्धारित फ्रीक्वेंसी बैंड दिए जाते हैं ताकि उनके सिग्नल व्यवस्थित तरीके से काम कर सकें और आपसी हस्तक्षेप कम हो।