मौजूदा परीक्षा प्रणाली में आती रही हैं अनेक दिक्कतें
मौजूदा परीक्षा प्रणाली में संस्थागत तौर पर कई सारी दिक्कतें सामने आती रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारों में अलग-अलग भर्ती बोर्ड होते हैं। सभी बोर्ड या आयोग अपने तरीके से विभिन्न पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड का तरीका बिल्कुल अलग है। एसएससी अपने तरीके से विभिन्न पदों पर भर्ती करती है।
बैंकिंग सेक्टर ने भी अपने यहां भर्ती के लिए अलग से नियम बना रखे हैं। इन संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया में तय मापदंडों का अभाव रहा है। खासतौर पर रेलवे और बैंकिंग सेक्टर की नौकरियों में महिला एवं पुरुष आवेदकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीण क्षेत्रों की काबिल महिलाएं चाहकर भी टेस्ट नहीं दे पाती थीं। अगर परीक्षा केंद्र कई सौ किमी दूर है तो उन्हें कई बार सोचना पड़ता था। साथ कौन जाएगा, कहां ठहरेगा। ऐसे कई सवाल होते थे जो आखिर में परिवार को इस निष्कर्ष पर पहुंचा देते थे कि छोड़ो अगली बार परीक्षा दे देना।
117 विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे
एनआरए की आयोजित की जाने वाली सामान्य पात्रता परीक्षा के लिए हर जिले में परीक्षा केंद्र स्थापित होगा। 117 विशेष परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को इसका लाभ मिलेगा। वे अपनी पसंद का सेंटर चुन सकेंगे। हालांकि दूसरे आवेदकों को भी पसंद का सेंटर देने का विकल्प दिया गया है।
एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन, तीनों की प्रारंभिक परीक्षा एक साथ होगी। तीनों एजेंसियों की प्रारंभिक परीक्षा का मापदंड भी एक ही रहेगा। विभिन्न भाषाओं में टेस्ट संभव हो सकेगा। वर्तमान प्रणाली में आवेदकों को अपने घर से बहुत दूरी पर परीक्षा केंद्र अलॉट होता है। जैसे पंजाब का परीक्षार्थी पश्चिम बंगाल या मुंबई में जाकर परीक्षा देने जाता है।
ऐसे में उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एनआरए देश के 700 से अधिक जिलों में परीक्षा केंद्र स्थापित करेगी। केंद्र सरकार के पास पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर और तकनीकी स्टाफ है। केंद्र सरकार में 'बी' और 'सी' ग्रुप के 1.25 लाख पदों पर भर्ती होती हैं। ढाई करोड़ से ज्यादा आवेदक इन परीक्षाओं में भाग लेते हैं। इस तरह की पचास भर्ती परीक्षाएं हर साल आयोजित होती हैं।
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में डेढ़ से दो साल का समय लगता है। कई परीक्षाएं तो ऐसी हैं, जिन्हें चार साल भी लग जाते हैं। अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच होती है। ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया लटक जाती है। कोर्ट में मामला जाता है तो रिजल्ट आने में देरी होती है।
आवेदक एक साथ ही कई परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा दे सकेगा
सीईटी, सामान्य परीक्षा से आवेदकों की छंटनी करेगी। परीक्षा में बैठने वाले आवेदकों को उनके अंकों के आधार पर एक स्कोर दिया जाएगा। यह स्कोर विभिन्न भर्ती एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा। जब फाइनल चयन प्रक्रिया शुरू होगी तो इस स्कोर को देखा जाएगा। आवेदक एक साथ ही कई परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा दे सकेगा।
मौजूदा व्यवस्था में कई बार ऐसा होता है कि एक ही दिन दो परीक्षाएं आ जाती हैं। दोनों के परीक्षा केंद्र भी दूर होते हैं। ऐसे में आवेदक को एक परीक्षा छोड़नी पड़ती है। अब एक दिन में एक ही परीक्षा होगी। आवेदक को मिला स्कोर तीन साल तक मान्य रहेगा।
सीईटी अपने सिस्टम के जरिए सर्वश्रेष्ठ स्कोर को मान्यता देगी। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का सामान्य रजिस्ट्रेशन पोर्टल होगा। इसमें प्रश्नपत्र बैंक, सेंट्रल सर्वर, टेस्ट सेंटर, टेस्ट नोड्स और स्कोर बोर्ड रहेगा। सुरक्षित परीक्षा प्रणाली और त्वरित परिणाम आने से आवेदकों की अनेक मुसीबतें खत्म हो जाएंगी। इस परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक होने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।