SSC GD 2018: पैदल मार्च करते अभ्यर्थी
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सिपाही भर्ती होने के लिए एसएससी जीडी 2018 (SSC GD 2018) की परीक्षा पास कर चुके हजारों अभ्यर्थी 47 डिग्री तापमान में नागपुर से दिल्ली तक का पैदल मार्च करने को मजबूर हैं। खास बात ये है इन अभ्यर्थियों का मेडिकल भी हो चुका है, लेकिन इन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका। ये अभ्यर्थी दिल्ली के जंतर-मंतर, राजघाट व देश के अन्य हिस्सों में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन व धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। पिछले चार माह से ये अभ्यर्थी, नागपुर में आमरण अनशन कर रहे थे। तबीयत बिगड़ने की वजह से दर्जनों युवाओं को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसके बाद भी जब केंद्रीय गृह मंत्रालय में इनकी बात नहीं सुनी गई तो इन अभ्यर्थियों ने दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू कर दिया। भीषण गर्मी के चलते कई अभ्यर्थी बीमार पड़ गए हैं। कुछ अभ्यर्थी, पांव में पड़े छाले व सूजन के चलते अस्पताल में भर्ती हुए हैं, लेकिन मरहम पट्टी कराने के बाद ये अभ्यर्थी दोबारा से 'टोली' में शामिल हो जाते हैं। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि इस बार केंद्रीय गृह मंत्रालय उन्हें निराश नहीं करेगा।
मेडिकल फिट युवाओं को अभी तक नहीं मिला न्याय
पैदल मार्च कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि एसएससी जीडी 2018 के 55 हजार मेडिकल फिट युवाओं को अभी तक न्याय नहीं मिल सका है। केंद्र सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए इन अभ्यर्थियों ने कई प्रयास किए हैं। सरकार की लापरवाही के चलते अधिकांश युवा अब उम्रदराज हो गए हैं। उनके पास दूसरी भर्ती में आवेदन करने का अवसर नहीं बचा है। इन अभ्यर्थियों ने केंद्रीय मंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति तक गुहार लगाई है, लेकिन बात नहीं बन सकी। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय से भी ये अभ्यर्थी मिल चुके हैं। नितिन गडकरी को ज्ञापन सौंपा है। कई मंत्रियों ने इन्हें आश्वासन दिया, मगर वे इन्हें वर्दी तक नहीं पहुंचा सके।
हमारे पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं
अभ्यर्थी राहुल, बीरा, नूतन कुमार, प्रदीप, अभिषेक व सचिन बताते हैं, हमारे पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सरकार कोई जवाब नहीं दे रही। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफसर मिलने से भी कतरा रहे हैं। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया, ज्ञापन दिए, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। अगर हमारे पास संसाधन होते तो हम कोई दूसरा काम धंधा कर लेते। हम बहुत ही सामान्य घरों के बच्चे हैं। मां-बाप ने दिहाड़ी मजदूरी या खेती-किसानी कर हमें पढ़ाया लिखाया है। बहुत से अभ्यर्थी तो ऐसे हैं, जिनके पास दिल्ली तक का किराया भी नहीं था। चूंकि उन्हें अपनी बात सरकार तक पहुंचानी थी, तो उनके परिजनों को कर्ज लेना पड़ा।
न्याय के लिए दे रहे अपने शरीर को कष्ट
पिछले साल 21 जनवरी को जब एसएससी जीडी 2018 के नतीजे जारी किए गए, तो उसमें 50 फीसदी युवाओं को मेडिकल पास होने के बाद मझधार में छोड़ दिया गया। साठ हजार से अधिक पदों के लिए भर्ती होनी थी। सरकार ने केवल 54 हजार पदों के लिए नियुक्ति पत्र जारी किया। लगभग 55 हजार ऐसे युवा पीछे रह गए, जो भर्ती की मेडिकल प्रक्रिया तक पास कर चुके थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने गत सप्ताह नागपुर से दिल्ली तक का पैदल मार्च शुरू किया है। हमारा मकसद है कि हम खुद अपने शरीर को कष्ट देकर सरकार को न्याय के लिए मजबूर कर दें। तपती सड़क पर तमाम शारीरिक दिक्कतों के बावजूद ये अभ्यर्थी रोजाना 30-35 किलोमीटर का सफर तय कर लेते हैं। हालांकि इस बीच अनेक युवाओं के पांव में छाले हो गए हैं। कई युवाओं के पांव में सूजन आई है। कुछ साथी बेहोश भी हो गए, लेकिन ये पैदल ही उन्हें अपने कंधों पर लेटाकर अस्पताल ले जाते हैं। जैसे ही उन्हें होश आता है, वे दोबारा से पैदल मार्च में शामिल हो जाते हैं। अनेक युवाओं के पांवों में पट्टी बंध चुकी है, लेकिन वे दिल्ली के रास्ते से जरा भी टस से मस नहीं होते।