वहीं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुईं भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई के निशाने पर अब आयोग के कई पूर्व सचिव भी हैं। वर्ष 2012 से 2017 तक आयोग में कुल आठ सचिवों की तैनाती रही और कुछ की तैनाती पर काफी विवाद भी रहा।
यहां तक कि एक सचिव को हाईकोर्ट के आदेश पर पर से हटाया गया। साथ ही दो सचिवों के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे अधिक विवाद सामने आए। सीबीआई अब इन पूर्व सचिवों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।
वैसे तो आयोग से जुड़े सभी निर्णय अध्यक्ष और सदस्यों की बैठक में लिए जाते लेकिन उन्हें लागू आयोग के सचिव ही करते हैं। यहां तक कि आयोग के निर्णय पर सचिव के हस्ताक्षर से ही आदेश जारी किए जाते हैं। ऐसे में अध्यक्ष एवं सदस्यों के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सचिव की होती है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव ने जब कार्यकाल संभाला तो उस वक्त बीबी सिंह आयोग के सचिव थे लेकिन माह भर बाद ही झांसी के कमिश्नर पद पर उनका तबादला कर दिया गया।