केंद्रीय राज्य मंत्री एसएस अहलूवालिया
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केंद्रीय राज्य मंत्री एसएस अहलूवालिया के बिहार के बेगूसराय के एक गांव में एक दलित परिवार के घर, बाहर का खाना खाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को बढ़ता देख एसएस अहलूवालिया ने शनिवार को इस पर सफाई दी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि घर की महिलाएं 200-300 लोगों के लिए खाना कैसे बना सकती हैं। हर गांव में एक खाना बनाने वाला होता है और खास अवसरों पर वही खाना बनाते हैं। इस मामले को मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? दलितों के घर खाना खाने के पीछे छिपी भावना को क्यों नहीं देखा जा रहा है?
उल्लेखनीय है कि हाल ही एसएस अहलूवालिया ने बिहार के बेगूसराय के एक गांव में एक दलित परिवार के घर पर खाना खाया था। लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि उन्होंने दलित परिवार के घर जो खाना खाया था, वह दलित के घर पर नहीं बना था बल्कि बाहर से मंगवाया गया था। इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के नेता ग्राम स्वराज अभियान के तहत देशभर के गांवों में जाकर दलितों के घर रुककर वहीं भोजन करते हैं।
बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि जहां और दलित विरोधी बन रही है वहीं मोदी सरकार के मंत्री अपने सरकार की छवि सुधारने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।
गौरतलब है कि पिछले महीने दलित समुदाय की कथित तौर पर बीजेपी से नाराजगी को दूर करने और 2019 लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी ने पार्टी नेताओं को दलित बहुल इलाकों में जाकर और वहां रात गुजारने का निर्देश दिया था।