भारत-श्रीलंका (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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चीन के कर्ज में फंसे श्रीलंका ने दोस्ती का कदम बढ़ाते हुए अपने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कोलंबो पोर्ट के वेस्टर्न कंटेनर टर्मिनल के विकास का ठेका भारत को दे दिया है। पड़ोसी देश ने मंगलवार को इस आशय के प्रस्ताव के मंजूरी की जानकारी दी।
टर्मिनल का विकास भारत और जापान के साथ बनी एक संयुक्त उद्यम कंपनी द्वारा किया जाएगा। श्रीलंका यह परियोजना 35 वर्ष के पट्टे पर देगा। बता दें कि श्रीलंका सरकार ने इस निर्णय से कुछ सप्ताह पहले इसी बंदरगाह पर एक टर्मिनल के विकास का ठेका रद्द कर दिया था। एक अधिकृत बयान में कहा गया कि श्रीलंका मंत्रिमंडल ने सोमवार को कोलंबो साउथ पोर्ट के वेस्ट कंटेनर टर्मिनल के विकास को मंजूरी दी है।
भारत तथा जापान सरकार के साथ एक संयुक्त कंपनी इसका विकास करेगी। बयान में कहा गया कि बनाओ, अपनाओ और सौंप दो (बीओटी) के आधार पर प्रस्तावित परियोजना को वार्ता कर रही समिति से मंजूरी मिलने के बाद उसे भारतीय उच्चायोग और जापानी दूतावास को भेजा गया था।
यूएनएचआरसी में श्रीलंका को भारत से उम्मीद
श्रीलंका ने उम्मीद जताई कि जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) इस महीने उससे संबंधित अपना नया जवाबदेही और सुलह प्रस्ताव रखेगा तो भारत उसके साथ खड़ा होगा। इससे कुछ ही दिन पहले संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट में लिट्टे के साथ सशस्त्र संघर्ष के अंतिम चरण के दौरान मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कदमों का आह्वान किया था। सरकारी प्रवक्ता एवं मंत्री केहलिया रामबुकवेला ने कहा कि इस प्रस्ताव में युद्ध अपराधों के लिए देश की आलोचना की गई है।