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पैसे नहीं थे तो मजबूरन कचरे से जलानी पड़ी पत्नी की चिता

Mon, 05 Sep 2016 12:38 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दाह संस्कार (सांकेतिक तस्वीर)
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मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय के एक शख्स को पत्नी की चिता टायर, कागज, प्लास्टिक और झाड़ियों से जलानी पड़ी। इंदौर से करीब 275 किलोमीटर दूर रतनगढ़ गांव में ररहने वाले जगदीश भील के पास पत्नी का अंतिम संस्कार करने के लिए भी पैसे नहीं थे। अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्नी की मौत के बाद वह कई घंटों तक उसके अंतिम संस्कार के लिए कचरा जमा करता रहा। कई लोगों ने उसे शव को नदी में प्रवाहित करने तक की सलाह दे डाली।
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 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के मुताबिक,  जगदीश ने बताया, 'मेरी पत्नी नोजीबाई का शुक्रवार सुबह निधन हुआ। हम अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां रतनगढ़ गए। लेकिन,  ग्राम प्रधान ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास 'पारची' के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं जिसमें 2,500 रुपए लगते हैं।' जगदीश ने कई लोगों से मदद मांगी लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद तब जाकर जगदीश के परिवार और कुछ मित्रों ने तीन घंटे तक कचरा जमा किया। इस तरह पत्नी का दाह संस्कार किया गया।
 
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जगदीश को है इस बात की पीड़ा

अंतिम संस्कार (सांकेतिक तस्वीर)
जगदीश का का कहना है कि उन्हें इस बात पीड़ा है कि उनकी पत्नी जीवन भर घर चलाने के लिए जंगल से लकड़ी जमा करती रही, लेकिन जब वह मरी तो वह उसकी चिता के भी लकड़ी का इंतजाम कर सका। नीमच के कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव ने घटना को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि  इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  
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