सीआरपीएफ के एक अधिकारी के अनुसार, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप 'एसपीजी' में सबसे अधिक डेपुटेशन शेयर सीआरपीएफ का है। चूंकि एसपीजी का अपना कॉडर नहीं है, इसमें राज्यों के पुलिस बल समेत विभिन्न सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों को डेपुटेशन पर भेजा जाता है। एक जवान करीब छह साल के लिए एसपीजी में जाता है। सर्विस रिपोर्ट के आधार पर उसका यह कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। सीआरपीएफ का डेपुटेशन कोटा 1,100 या उससे अधिक है।
केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि एसपीजी होते हुए गांधी परिवार ने सुरक्षा को लेकर कई बार जोखिम उठाया था। आरोप है कि गांधी परिवार के सदस्य एसपीजी के नियमों का लगातार उल्लंघन करते रहे हैं। कई बार तो यह भी देखने को मिला कि सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति कहीं जाने के लिए अपनी गाड़ी में जाकर बैठ गया, लेकिन उन्हें कहां जाना है, यह जानकारी एसपीजी के पास नहीं थी। इतना ही नहीं, अनेकों बार ये भी हुआ कि वे एसपीजी दस्ते को अपने साथ ही नहीं ले गए। राहुल गांधी ने 2005-2014 के दौरान कई बार गैर-बीआर (बुलेट प्रतिरोधी) वाहनों में सफर किया है।
उन्होंने गैर-बीआर वाहन में सवार होकर देश के विभिन्न हिस्सों की 18 यात्राएं की हैं। यह कदम उनकी जान के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता था। उन्होंने एसपीजी की सलाह को दरकिनार किया। केवल दिल्ली की बात करें तो राहुल गांधी ने 2015 से मई 2019 तक 247 बार बिना बुलेट प्रूफ गाड़ी में सफर किया है। इसी तरह सोनिया गांधी ने 50 बार और प्रियंका गांधी ने 403 बार एसपीजी द्वारा तैयार बुलेट प्रूफ वाहन का इस्तेमाल नहीं किया।
गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटने के बाद उन्हें तीन-तीन बुलेट प्रूफ वाहन मुहैया कराए गए हैं, ये सभी वाहन एसपीजी से ही मिले हैं। इससे पहले एसपीजी सुरक्षा वाले वीवीआईपी को बीएमडब्लू, रेंज रोवर, मर्सडीज बैंज, लैंड क्रूजर, टोयोटा फॉर्च्यूनर और टाटा सफारी जैसे बुलेटप्रूफ वाहन मिलते रहे हैं। इनमें से कई वाहन बख्तरबंद होते हैं, चूंकि अब गांधी परिवार को सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा दी जा रही है, इसलिए उन्हें बख्तरबंद जैसी गाड़ियां नहीं मिलेंगी। इन्हें केवल बुलेट प्रूफ वाहन उपलब्ध कराया गया है। दिल्ली से बाहर जब वे दूसरे राज्य में जाएंगे तो वहां की सरकार उन्हें बुलेट प्रूफ गाड़ी मुहैया कराएगी।
जिन वीवीआईपी को एसपीजी सुरक्षा मिली होती है, उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे निजी गाड़ियों में नहीं चलेंगे। संबंधित सुरक्षा एजेंसी भी उन्हें इसकी इजाजत नहीं देती। ऐसी सभी गाड़ियों को एसपीजी अपने हिसाब से तैयार कराती है। जैसे पीएम या पूर्व पीएम को बीएमडब्लू 760 एलआई (एफ 03) हाई सुरक्षा से लैस गाड़ी मुहैया कराई जाती है। यह बख्तरबंद गाड़ी बैलेस्टिक रोधी होती है।
बीएमडब्लू के बाद रेंज रोवर (एल 405) का नंबर आता है। यह भी बख्तरबंद गाड़ी होती है। पीएम या पूर्व पीएम के परिजनों को ज्यादातर यही गाड़ी प्रदान की जाती है। बहुत से लोगों ने काले या गहरे नीले रंग की इसी बख्तरबंद गाड़ी में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को यात्रा करते देखा होगा। लैंड क्रूजर, टोयोटा फॉर्च्यूनर और टाटा सफारी जैसी एसयूवी एसपीजी कर्मियों के लिए होती हैं। इन गाड़ियों में कई तरह का सुरक्षा सिस्टम होता है, जो किसी भी खतरे का अलर्ट देता है। जैमर, रडार, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल आदि की सूचना समय रहते मिल जाती है। एसपीजी सुरक्षा काफिले में हाई-टेक वाहन, जैमर और एक एंबुलेंस भी रहती है।