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राजनीति: जितिन के जाने से कांग्रेस के थिंक टैंक पर सवाल, एक महीने का परिणाम नहीं दल-बदल

Wed, 09 Jun 2021 07:54 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि आप खुद सोचिए कि पश्चिम बंगाल के कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर क्या असर पड़ा होगा जितिन के भाजपा ज्वाइन करने से। लोग तो आलाकमान पर शक करेंगे कि उनको नेताओं की पहचान नहीं है...
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भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस की लीडरशिप किस कदर बेपटरी हो चुकी है इसका अंदाज़ा जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने से लगाया जा सकता है। जिन जितिन प्रसाद को बंगाल चुनाव में कांग्रेस को जिताने के लिए प्रभारी बनाकर भेजा गया था, वही प्रभारी परिणामों के एक महीने के भीतर ही भाजपा का दामन थाम ले तो कांग्रेस पार्टी को भी यह समझना चाहिए कि ऐसी भूमिका एक महीने में नहीं बनती। जितिन का भाजपा में जाना जो भी राजनैतिक समीकरण बनाते हों लेकिन एक बात स्पष्ट है कि कांग्रेस ने जिस पश्चिम बंगाल को जीतने के लिए जितिन प्रसाद पर दांव लगाकर प्रभारी बना कर भेजा वह यह बताता है कि कांग्रेस का थिंक टैंक अब किस तरह से काम कर रहा है।

ऐसी बातें कांग्रेस कैंप में अब खूब हो रहीं हैं

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि आप खुद सोचिए कि पश्चिम बंगाल के कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर क्या असर पड़ा होगा जितिन के भाजपा ज्वाइन करने से। लोग तो आलाकमान पर शक करेंगे कि उनको नेताओं की पहचान नहीं है। ऐसे नेता को प्रभारी बना दिया जो भाजपा के एजेंट के तौर पर काम करते रहे। कांग्रेस के उक्त नेता ने कहा कि जो प्रभारी हो और चुनाव परिणामों के बाद एक महीने में ही विपक्षी पार्टी में चला जाए तो उससे यह उम्मीद भी बेमानी है कि वह मन से कांग्रेस को जिताने में लगे होंगे। क्योंकि ऐसे फैसले एक महीने में नहीं होते। जितिन प्रसाद के बारे में तो पहले भी कई बार भाजपा में जाने की अटकलें लगती रहीं थीं।

44 से ज़ीरो पर आने के पीछे क्या है गणित

कांग्रेस नेता जो अब दबी ज़ुबान से कहने लगे हैं कि हम बंगाल फ़तह करने की बात कर रहे थे लेकिन वहां पर हम 44 से जीरो पाए आ गए। फिर समीक्षा बैठकें हुईं लेकिन इसकी मूल जड़ में कोई नहीं गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब दांव ऐसे नेता पर लगाया गया जिसका अपनी पार्टी में ही भरोसा ही नहीं था। वह पश्चिम बंगाल में कैसे भाजपा के सामने कांग्रेस की विचारधारा को आगे ले जा पाता। नतीजा सबके सामने है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 44 से ज़ीरो पर सिमट गई।

प्रभारी दे रहे दगा

कांग्रेस में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे बनाये जाने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पार्टी छोड़ दी थी। कांग्रेस के पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता कहते हैं कि पार्टी के थिंक टैंक को सोचना चाहिए कि हमसे गलतियां कहां पर हो रही हैं। वे कहते हैं कि जब कांग्रेस के पास एक बड़ा तबका युवाओं से भरा है, जिसकी जमीनी पकड़ है, उसे जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। राहुल और प्रियंका के करीब रहे सिंधिया और अब जितिन प्रसाद का जाना बताता है कि पार्टी में अभी भी बहुत कुछ सुधारने की गुंजाइश है। कांग्रेस के सिर्फ युवा नेता ही नही बल्कि कई दिग्गज खुलकर बोलते हैं कि इस पार्टी में कुछ लोग ही सब गड़बड़ करके पार्टी को बेपटरी करते रहते हैं।

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