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विवादित ढांचा: विशेष जज ने फैसले के लिए मांगा छह माह का और वक्त

Tue, 16 Jul 2019 03:24 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ayodhya dispute‬
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अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने की साजिश मामले में सुनवाई कर रहे विशेष जज ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई पूरी करने के लिए छह माह का वक्त और मांगा है। हालांकि, जज एसके यादव 30 सितंबर को ही रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जज का कार्यकाल आगे बढ़ाने के लिए रास्ता तलाशने को कहा है। 
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शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार से कहा है कि जज एसके यादव जब तक फैसला नहीं दे देते, तब तक उन्हें रिटायर न किया जाए। इसके लिए क्या किया जा सकता है? इसके लिए क्या नियम और कानून हैं? जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, ये बेहद जरूरी है कि जज यादव ही मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाएं, क्योंकि उन्होंने पूरे मामले की सुनवाई की है। 

उत्तर प्रदेश सरकार को शुक्रवार तक बताना है कि इसको लेकर कानूनी प्रावधान क्या हैं? प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ अब शुक्रवार को ही इस मामले की सुनवाई करेगी। विशेष जज ने सुप्रीम कोर्ट को बीते 25 मई को पत्र लिखकर बताया था कि उन्हें फैसले के लिए छह माह का वक्त और चाहिए, जबकि वह 30 सितंबर को ही रिटायर हो रहे हैं।
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...वर्ना अनुच्छेद 142 के तहत जारी करेंगे आदेश

पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ऐश्वर्या भाटी से कहा कि जज का कार्यकाल बढ़ाने के लिए कुछ रास्ता निकालें और संबंधित कायदे-कानून बताएं। पीठ ने कहा कि जरूरी हुआ तो हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आदेश जारी करेंगे ताकि विशेष जज का कार्यकाल बढ़ाया जा सके। 
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क्या है अनुच्छेद 142?

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट के आदेश देश के कानून माने जाते हैं। इसके तहत जब तक किसी अन्य कानून को लागू नहीं किया जाता तब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि माना जाता है। अपने न्यायिक निर्णय देते समय कोर्ट ऐसे निर्णय दे सकता है जो इसके समक्ष लंबित पडे़ किसी भी मामले को पूरा करने के लिए जरूरी हों और इसके द्वारा दिये गए आदेश संपूर्ण भारत संघ में तब तक लागू होंगे जब तक इससे संबंधित किसी अन्य प्रावधान को लागू नहीं कर दिया जाता है।

सुनवाई पूरी करने के लिए दो साल का दिया गया था वक्त

उल्लेखनीय है कि इस मामले में लखनऊ की सीबीआई अदालत में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 12 आरोपियों पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चल रहा है। इस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता एलके आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी आरोपी हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ढांचा ढहाने की साजिश के मामले में 19 अप्रैल 2017 को दो साल में ट्रायल पूरा करने के आदेश दिए थे। वहीं रामजन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल के चेयरमैन जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला से गुरुवार तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। 

ज्ञात हो कि कोर्ट ने बातचीत से समाधान की संभावना तलाशने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया है। शीर्ष अदालत अब 25 जुलाई से मामले की रोजाना सुनवाई पर विचार करेगी।
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