शेक्सपियर ने कहा था, 'नाम में क्या रखा है', लेकिन तमिलनाडु असेंबली में सीएम जयललिता का नाम लेना है या नहीं इस पर विवाद हो गया। सोमवार को असेंबली में यह बड़ा मुद्दा बन गया। इसके बाद डीएमके विधायकों ने प्रदर्शन किया और विधानसभा से बाहर आ गए।
इसकी शुरुआत तब हुई जब एआईएडीएमके विधायक पीएम नरसीमन ने विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान डीएमके चीफ एम करुणानिधि को नाम से बुला दिया। इससे नाराज डीएमके के विधायकों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। वे स्पीकर पी धनपाल से पूछना चाहते थे कि क्या पूर्व सीएम को उनके नाम से बुलाना सही है? इसके जवाब में स्पीकर ने कहा, 'पूर्व सीएम को नाम से बुलाने पर कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।'
इसके तुरंत बाद, डीएमके विधायकों ने सवाल किया कि क्या वे भी सीएम जयललिता को नाम से बुला सकते हैं। इस पर स्पीकर ने कहा, 'सीएम को उनके नाम से नहीं बुलाया जा सकता है। यह मेरा आदेश है।' इससे नाराज डीएमके विधायकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया और विधानसभा से बाहर चले गए।
विधानसभा के बाहर डीएमके नेता और नेता प्रतिपक्ष एमके स्टालिन ने कहा, 'विधानसभा के कोड सेक्शन में यह कहीं नहीं कहा गया है कि एमएलए को नाम से नहीं बुलाया जा सकता। जब यह लॉ है तो हम जयललिता को नाम से क्यों नहीं बुला सकते। स्पीकर का आदेश लॉ के विरुद्ध है। हम इसकी निंदा करने के लिए असेंबली से बाहर आए।'