सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्यपाल को स्पीकर के कार्य में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है क्योंकि वह न तो स्पीकर के गाइड हैं और न ही मेंटर। शीर्ष अदालत ने तीन साल पहले अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल जेपी राजखोवा के फ्लोर टेस्ट के आदेश के मामले में यह फैसला दिया था। कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला ने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को दो बार बहुमत साबित करने की समयसीमा दी थी। दूसरी ओर इस मामले को लेकर संविधान विशेषज्ञ भी बंटे हुए हैं।
राज्यपाल निर्देश दे सकते हैं
संविधान के अनुच्छेद 175 के तहत राज्यपाल को सदन को संदेश देने का अधिकार है। विधानसभा भी निर्देश पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने को लेकर बाध्य है। अनुच्छेद 168 में स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल भी राज्य विधानसभा का एक हिस्सा हैं। - सुभाष कश्यप, पूर्व महासचिव, लोकसभा
लंबित बिल पर ही दे सकते हैं निर्देश
राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 175 की परिभाषा को विस्तारित किया है। राज्यपाल सिर्फ लंबित विधेयकों के संदर्भ में विधानसभा को संदेश भेज सकते हैं। यह एक असाधारण कदम है, जो राज्यपाल ने उठाया है। अंतत: अदालत तय करेगी कि राज्यपाल को अधिकार है या नहीं। - पीडीटी आचार्य, पूर्व महासचिव, लोकसभा