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SpaDex: डेढ़ किलोमीटर दूर हैं दोनों उपग्रह, आज और करीब लाए जाएंगे; इसरो ने सोशल मीडिया पोस्ट में दी जानकारी

Fri, 10 Jan 2025 11:16 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

इसरो ने पोस्ट में लिखा, उपग्रह 1.5 किलोमीटर की दूरी पर हैं और होल्ड मोड पर हैं। शनिवार सुबह तक 500 मीटर की और दूरी तय करने की योजना है। इससे पहले बुधवार को इसरो ने बृहस्पतिवार को होने वाली डॉकिंग टाल दी थी। ऐसा उपग्रहों के एक दूसरे से काफी दूर चले जाने के कारण हुआ था।
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इसरो का स्पैडेक्स मिशन - फोटो : X / @isro
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विस्तार
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 इसरो के स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट (स्पैडेक्स) के लिए अंतरिक्ष में भेजे गए दो उपग्रह अभी डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हैं। इसरो ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि दोनों उपग्रहों को शनिवार को और करीब लाया जाएगा।

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इसरो ने पोस्ट में लिखा, उपग्रह 1.5 किलोमीटर की दूरी पर हैं और होल्ड मोड पर हैं। शनिवार सुबह तक 500 मीटर की और दूरी तय करने की योजना है। इससे पहले बुधवार को इसरो ने बृहस्पतिवार को होने वाली डॉकिंग टाल दी थी। ऐसा उपग्रहों के एक दूसरे से काफी दूर चले जाने के कारण हुआ था। यह दूसरा मौका था जब डॉकिंग टाली गई थी। 

उड़ान के 15 मिनट बाद कक्षा में प्रक्षेपित किए दो छोटे अंतरिक्ष यान
पीएसएलवी सी60 रॉकेट ने दो छोटे उपग्रहों, एसडीएक्स01 (चेजर) और एसडीएक्स02 (टारगेट) तथा 24 पेलोड को लेकर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्चपैड से उड़ान भरी थी। उड़ान के लगभग 15 मिनट बाद, लगभग 220 किलोग्राम वजन वाले दो छोटे अंतरिक्ष यान को 475 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया गया था। 
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अंतरिक्ष में डॉकिंग जटिल प्रक्रिया, अभी तीन देशों को महारत हासिल
लॉन्चिंग के बाद इसरो डॉकिंग की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए कई चरणों/अवस्थाओं की आवश्यकता होती है। अंतरिक्ष में डॉकिंग एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें अब तक केवल तीन अन्य देश - अमेरिका, रूस और चीन ही महारत हासिल कर पाए हैं।

पीएसएलवी रॉकेट से की गई लॉन्चिंग 
इसरो के अनुसार, स्पैडेक्स मिशन एक ऐसा कार्यक्रम है जो दो छोटे अंतरिक्ष यान को पीएसएलवी रॉकेट से लॉन्च करके अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रदर्शन के लिए किया गया है। यह तकनीक भारत की अंतरिक्ष योजनाओं जैसे चंद्रमा पर भेजने, चंद्रमा से नमूने लाने, और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) का निर्माण और संचालन आदि के लिए जरूरी है। 

कई रॉकेटों को लॉन्च करने करने के लिए डॉकिंग तकनीक महत्वपूर्ण 
जब सामान्य मिशनों के लिए कई रॉकेटों को लॉन्च करना पड़ता है, तो अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस मिशन के जरिए, भारत अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक रखने वाला दुनिया का चौथा देश बनने की ओर अग्रसर है। 
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