उत्तर प्रदेश के सभी सपा विधायकों को रिव्यू की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। उनकी आम शोहरत, जनता के बीच उनकी छवि के साथ ही 2017 के इलेक्शन में उनकी जीत की संभावनाओं पर पूरी रिपोर्ट तैयार हो रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर फैसला होगा कि इन्हें पार्टी की ओर से दोबारा सियासी संग्राम में उतारा जाए अथवा नहीं।
रिव्यू के बाद कई लोगों का टिकट कटना तय माना जा रहा है। पार्टी हाईकमान भी इस तरफ इशारा कर चुका है। प्रदेश के आगामी सियासी युद्ध के लिए सपा ने फील्डिंग सजानी शुरू कर दी है। 142 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने के साथ ही अब पार्टी अपने सभी विधायकों को परखेगी। चार साल के कार्यकाल में उन्होंने जनता के बीच कैसी छवि बनाई।
पब्लिक के बीच कहीं उनका विरोध तो नहीं है। संगठन के बीच तो उनकी मुखालफत नहीं हो रही वगैरह..वगैरह। विधायकों के बारे में संगठन से तो रिपोर्ट ली ही जा रही है, सपा अपने खामोश सिपहसलारों का भी इस्तेमाल करेगी।
कहीं कहीं सरकारी मशीनरी से भी मौजूदा विधायकों के बारे में राय शुमारी चल रही है। वहीं कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव कह चुके हैं कि कुछ विधायकों के टिकट कट सकते हैं। केंद्रीय संसदीय बोर्ड और या सपा मुखिया ही इस पर अंतिम फैसला लेंगे।