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माया-अखिलेश को मिलाने में डॉ. लोहिया की 'उस चिट्ठी' की अहम भूमिका

Sat, 12 Jan 2019 05:21 PM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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mayawati, akhilesh yadav
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भाजपा के खिलाफ शनिवार लखनऊ से सपा-बसपा ने गठबंधन कर आगामी लोकसभा चुनाव साथ लड़ने का एलान कर दिया है। दोनों पार्टियां राज्य की 38-38 लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। जबकि शेष 2 सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ दिया गया है। इस गठबंधन पर पूरे देश की नजर है। यह गठबंधन यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 76 पर चुनाव लड़ेगा।  
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बता दें कि एक बार समाजवादी विचारधारा के नायक डॉ. राम मनोहर लोहिया ने भी ऐसी ही कोशिश की थी। उन्होंने दलितों के मसीहा कहे जाने वाले डॉ. भीम राव अंबेडकर को चिट्ठी लिखकर कहा था कि वो सिर्फ अनुसूचित जातियों के नेता बनने तक सीमित न रहें बल्कि पूरी हिंदुस्तानी जनता की आवाज बनें। राम मनोहर लोहिया ने यह चिट्ठी 10 दिसंबर 1955 में लिखी थी।  

उन्होंने लिखा था कि... 'प्रिय डॉक्टर अंबेडकर, मैनकाइंड (अखबार) पूरे मन से जाति समस्या को अपनी संपूर्णता में खोलकर रखने का प्रयत्न करेगा। इसलिए आप अपना कोई लेख भेज सकें तो प्रसन्नता होगी। आप जिस विषय पर चाहें लिखिए। हमारे देश में प्रचलित जाति प्रथा के किसी पहलू पर आप लिखना पसंद करें, तो मैं चाहूँगा कि आप कुछ ऐसा लिखें कि हिंदुस्तान की जनता न सिर्फ क्रोधित हो बल्कि आश्चर्य भी करे। 
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मैं चाहता हूं कि क्रोध के साथ दया भी जोड़नी चाहिए। ताकि आप न सिर्फ अनुसूचित जातियों के नेता बनें बल्कि पूरी हिंदुस्तानी जनता के भी नेता बनें। मैं नहीं जानता कि समाजवादी दल के स्थापना सम्मेलन में आपकी कोई दिलचस्पी होगी या नहीं। सम्मेलन में आप विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में आ सकते हैं। अन्य विषयों के अलावा सम्मेलन में खेत मजदूरों, कारीगरों, महिलाओं, और संसदीय काम से संबंधी समस्याओं पर भी विचार होगा और इनमें से किसी एक पर आपको कुछ बात कहनी ही है।' - सप्रेम अभिवादन सहित, आपका राम मनोहर लोहिया।

इसके बाद डॉ. अंबेडकर ने भी इस चिट्ठी का जवाब लोहिया को दिया था। उन्होंने लोहिया से मिलने की भी इच्छा व्यक्त की थी। 20 अक्टूबर 1956 को दोनों नेताओं ने बीच एक ऐतिहासिक मुलाकात भी होनी थी। लेकिन किसी कारणवश वह मुलाकात नहीं हो पाई। कोई मुलाकात हो पाती उससे पहले ही करीब डेढ़ महीने बाद 6 दिसंबर 1956 को डॉ. अंबेडकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 
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