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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती आज, पीएम मोदी सहित सोनिया, राहुल ने दी श्रद्धांजलि

Mon, 20 Aug 2018 10:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश को संचार क्रांति और कंप्यूटर क्रांति में अग्रणी बनाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज 75वीं जयंती है। आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर राजीव गांधी को उनके देश के लिए किए गए काम को याद किया और श्रद्धांजलि भी दी। राजीव गांधी के समाधि स्थल पर  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी सुबह वीरभूमि पहुंचे और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।
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इस मौके पर राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी और उनके पति रॉबर्ट वड्रा भी मौजूद थे। अपने पिता को याद करते हुए राहुल गांधी ने ट्वीट किया, 'राजीव गांधी एक विनम्र, सज्जन और स्नेह करने वाले व्यक्ति थे जिनके जाने से मेरे जीवन में बड़ा शून्य पैदा हुआ।' 

उन्होंने कहा, 'मुझे वो समय याद आ रहा है जब हम साथ थे और हम सौभाग्यशाली थे कि उनके जीवित रहते हुए हमने उनके कई जन्मदिन साथ मनाए। उनकी कमी बहुत महसूस होती है लेकिन उनकी यादें जिंदा हैं।' 
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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए ट्वीट किया, 'इक्कीसवीं सदी में भारत को आधुनिकीकरण के पथ पर ले जाने वाले, करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, सहिष्णुता, सद्भावना और बलिदान की पहचान, शान्तिदूत तथा राष्ट्र निर्माता, भारत रत्न राजीव गांधी जी की जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।' 

उन्होंने कहा, 'राजीव जी, आप हमारे दिलों में सदैव रहेंगे।' पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह 1984 से 1989 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदुर में 21 मई, 1991 को आम चुनाव के प्रचार के दौरान एलटीटीई के एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।

राजीव गांधी को भारत में कंप्यूटर क्रांति लाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारतीय घर तक लाने का काम किया बल्कि भारत में इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया।

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह भारी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी की राजनीति में कोई रूचि नहीं थी और वो एक एयरलाइन पायलट की नौकरी करते थे और उसी में खुश थे. लेकिन आपातकाल के उपरान्त जब इंदिरा गांधी को सत्ता छोड़नी पड़ी थी।  वहीं साल 1980 में छोटे भाई संजय गांधी की हवाई जहाज दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के बाद माता इंदिरा का सहयोग देने के लिए उन्होंने राजनीति में प्रवेश कर लिया।
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