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सोनिया की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग' पर सियासी संग्राम: कांग्रेस का दावा- प्रकाशक पर दबाव; भाजपा ने किया पलटवार

Sat, 29 Aug 2026 03:02 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोनिया गांधी के प्रस्तावित संस्मरण को भारत में प्रकाशित किए जाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि भारतीय प्रकाशन संस्था पर किताब रोकने या उसमें बदलाव कराने के लिए दबाव बनाया गया। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है।
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सोनिया गांधी की आत्मकथा पर विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया पर सोनिया गांधी के संस्मरण को प्रकाशित नहीं करने के लिए दबाव डाला गया है। इस आरोप के बाद सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। विवाद तब शुरू हुआ जब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि वह सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का प्रकाशक नहीं है। यह बयान अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से किताब को 10 नवंबर को प्रकाशित करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आया।
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अल्फ्रेड ए. नॉफ पेंगुइन रैंडम हाउस की एक प्रकाशन इकाई है। उसने कहा था कि संबंधित चर्चाओं के दौरान वह इस संस्मरण को प्रकाशित करने की इच्छुक थी। हालांकि, प्रकाशक ने कहा कि लेखकों की सामग्री की तथ्य-जांच करना उसका अधिकार और जिम्मेदारी है। यह बयान उन खबरों के बीच आया, जिनमें कहा गया था कि सोनिया गांधी द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद प्रमुख प्रकाशक ने किताब प्रकाशित करने का फैसला वापस ले लिया।

कांग्रेस ने साधा भाजपा-आरएसएस पर निशाना
कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन इंडिया के बयान की आलोचना की और इसे कमजोर बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ''यह कितना कमजोर बयान है। पेंगुइन इंडिया 'एग्जाम वॉरियर्स' और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कई किताबें प्रकाशित करने में पूरी तरह खुश है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा सरकार में ऐसे लोग हैं, जो अब इस बात से डर गए हैं कि भारत के लोग इस किताब को पढ़ेंगे।''
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से पूछा कि जब उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन इकाई इस संस्मरण को दुनिया भर में प्रकाशित कर रही है तो भारत में इसे प्रकाशित करने से उसे क्या रोक रहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ''पेंगुइन की अंतरराष्ट्रीय इकाई सोनिया गांधी की आगामी किताब को उसके मूल रूप में पूरी दुनिया में प्रकाशित करने के लिए तैयार है, लेकिन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसे भारत में प्रकाशित करने से पहले बदलाव चाहता है। आखिर ऐसी क्या वजह है या ऐसा कौन सा दबाव है कि जो किताब पूरी दुनिया में प्रकाशित हो रही है, उसे भारत में प्रकाशित नहीं किया जा सकता?''

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आगे कहा, ''इतने कद की व्यक्ति, देश की वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी की किताब को दबाव में दबाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हत्या के समान है।''



विपक्ष ने भी किया कांग्रेस का समर्थन
सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर हुए विवाद पर सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा, ''लेखिका को अपने मन की बात लिखने का पूरा अधिकार है, और यह एक तरह की आत्मकथा ही है। इसमें से कुछ अंश हटाने का कोई मतलब नहीं है। इसके पीछे क्या तर्क है? इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। कई प्रकाशक हैं, और मुझे उम्मीद है कि उनमें से कुछ इसे जल्द ही प्रकाशित करेंगे।''

नकवी बोले- यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण
पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सोनिया गांधी की किताब पर जारी विवाद पर कहा कि यह लेखक और प्रकाशक के बीच का मामला है। वे तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए नकवी ने कहा, "यह सोनिया गांधी का संस्मरण है या कल्पना है, ये तो लेखक और प्रकाशक के बीच की बात है। प्रकाशक और लेखक ही तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। मुझे लगता कि इसमें किसी को राजनीति करने की जरूरत है। आप अगर संस्मरण के नाम पर कल्पनाएं लिख कर रहे हैं और उनमें भी कई तरह के फ्रिक्शन हों या फर्जी और मनगढ़ंत किस्से-कहानियां हों तो निश्चित रूप से उसमें प्रकाशक के साथ भी जिम्मेदारी होती है।"

भाजपा ने किया पलटवार
कांग्रेस नेताओं के आरोप पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि कांग्रेस नेता संस्मरण को लेकर 'डर की झूठी कहानी गढ़ने और एक गलत धारणा बनाने' की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि कांग्रेस के ये प्रयास सिर्फ विडंबना से ही नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से पाखंड से भी भरे हैं।
गौरव गोगोई के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, ''सोनिया गांधी के संस्मरण के संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि उनके संस्मरण के किन हिस्सों में तथ्य-जांच की जरूरत पड़ी और क्यों?''

भाजपा नेता अजय आलोक ने भी कांग्रेस पर किताब में 'तथ्यों को सामने नहीं रखने' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''यह झुकने का सवाल नहीं है। यह शर्म की बात है कि किताब लिखते समय भी आप तथ्य और आंकड़े सामने नहीं रख रहे हैं। इसी वजह से प्रकाशक इसे प्रकाशित करने के लिए तैयार नहीं हैं। क्योंकि सत्यापन करना जरूरी है और विश्वसनीयता बनाए रखनी होती है।''
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