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'इटैलियन चश्मा उतारकर देखिए भारत की तरक्की': सोनिया गांधी को भाजपा की नसीहत; इमरजेंसी पर भी घेरा; विवाद क्यों?

Sat, 07 Nov 2026 03:30 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर लोकतंत्र और संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने 1975 की इमरजेंसी को सांविधानिक प्रक्रिया के तहत उठाया गया कदम बताया, हालांकि लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगने की बात भी स्वीकार की। भाजपा ने उनके बयानों पर पलटवार करते हुए पिछले 12 वर्षों की विकास दर और देश की प्रगति का हवाला दिया। पार्टी ने बटला हाउस मुठभेड़, 1984 के दंगों, बोफोर्स और भोपाल गैस त्रासदी जैसे पुराने मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा। क्या है मामला? जानिए...
 
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भाजपा ने सोनिया गांधी को घेरा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के मोदी सरकार पर लोकतंत्र और संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा ने उन्हें पिछले 12 वर्षों में देश की तरक्की देखने की नसीहत दी। पार्टी ने सोनिया गांधी के इमरजेंसी को सांविधानिक बताने वाले बयान पर भी सवाल उठाए। साथ ही बटला हाउस मुठभेड़, 1984 के सिख विरोधी दंगों और बोफोर्स मामले का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा।
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सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को लेकर क्या कहा था?
सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' के विमोचन से पहले अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' को साक्षात्कार दिया था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में देश के लोकतंत्र, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की व्यवस्था को गहरा नुकसान हुआ है। यहां तक कि मोदी सरकार के जाने के बाद भी देश की संस्थाओं और व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में समय लगेगा। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि अब लोग इस नुकसान को समझने लगे हैं और उनमें बेचैनी बढ़ रही है।

भाजपा ने सोनिया गांधी को 'इटैलियन चश्मा' उतारने की सलाह क्यों दी?
सोनिया गांधी के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने कहा कि सोनिया गांधी को 'इटैलियन चश्मा' उतारकर भारत की तरक्की देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में प्रगति की है और भारत वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। चुघ ने कहा, 'अगर आप अपना इटैलियन चश्मा उतार देंगी तो आपको भारत की असली तस्वीर दिखाई देगी। सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और 7.8 प्रतिशत की जीडीपी विकास दर के साथ आगे बढ़ता भारत नजर आएगा।' भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि देशभर में आस्था की नई लहर दिखाई दे रही है, लेकिन सोनिया गांधी इसे पचा नहीं पा रही हैं।
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भाजपा ने सोनिया गांधी की किताब को लेकर कौन से सवाल उठाए?
तरुण चुघ ने कहा कि सोनिया गांधी को अपनी किताब में कांग्रेस शासन के दौरान सामने आए कथित घोटालों का भी जिक्र करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर जाति, धर्म और वोट बैंक की राजनीति के जरिए देश को बांटने का आरोप लगाया।

चुघ ने क्या-क्या मुद्दे उठाए?
चुघ ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान सामने आए विभिन्न घोटालों पर सोनिया गांधी अपनी किताब में क्या लिखेंगी? बटला हाउस मुठभेड़ में आतंकी के मारे जाने के बाद सोनिया गांधी के कथित तौर पर रोने को लेकर चुघ ने सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि ऐसा क्यों हुआ था? भारतीय सैनिकों की शहादत पर सोनिया गांधी ने अब तक कोई बयान क्यों नहीं दिया? 1984 के सिख विरोधी दंगों और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के 'जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है' वाले बयान पर वह क्या कहेंगी? बोफोर्स तोप सौदे में कथित दलाली और इसमें शामिल लोगों को लेकर वह क्या लिखेंगी?

चुघ ने आगे कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के आरोपियों को देश से बाहर जाने की अनुमति कैसे मिली और इसके पीछे किसका हाथ था? भारतीय संस्कृति को कभी बीमारी तो कभी संक्रमण बताने वाले बयानों पर सोनिया गांधी का क्या रुख है? चुघ ने आरोप लगाया कि भाजपा और एनडीए सरकार के दौरान सनातन धर्म के प्रति बढ़ती आस्था को कांग्रेस स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि भारत ऋषियों, संतों, तपस्वियों और साधना की भूमि है और हमेशा ऐसा ही रहेगा।

यह भी पढ़ें: 'गीता के संदेश ने बदला फैसला': राजनीति में उतरने से पहले खुद से जूझ रही थीं सोनिया गांधी, किताब में खुलासा

इमरजेंसी पर सोनिया गांधी ने क्या कहा, भाजपा को क्यों हुई आपत्ति?
सोनिया गांधी ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को सांविधानिक प्रक्रिया के तहत उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगी थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार भी निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, यह सब सांविधानिक तरीके से हुआ था। सोनिया गांधी ने कहा कि बाद में उन्हें इस बात की गंभीरता समझ आई कि उस समय वास्तव में क्या हो रहा था।

उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नजरिये से उस दौर को देखने की कोशिश भी की। सोनिया के मुताबिक, उस समय हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन को आग लगाई जा रही थी। बड़े पैमाने पर अशांति फैली हुई थी। यहां तक कि नौकरशाही और सशस्त्र बलों से सरकारी आदेश नहीं मानने की अपील भी की गई थी। सोनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ते हालात से निपटने की कोशिश कर रही थीं।
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भाजपा ने इमरजेंसी और 1984 के दंगों को लेकर क्या पलटवार किया?
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोनिया गांधी पर इमरजेंसी को सही ठहराने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सोनिया गांधी इंदिरा गांधी को पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनका जनसंपर्क अभियान सच्चाई को नहीं छिपा सकता। भंडारी ने इमरजेंसी लगाने और 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी-वाड्रा परिवार को देश ने माफ नहीं किया है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने सोनिया गांधी पर वोट बैंक की राजनीति करने और हिंदुओं के प्रति विरोध रखने का आरोप लगाया।
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