लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सोमवार को कहा कि महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने में राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने जल्दबाजी दिखाई। यह वाकया खराब मिसाल साबित होगी जो कि लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि संविधान में एक प्रक्रिया है और राज्यसभा के सभापति को इसका पालन करना चाहिए था। पिछले महाभियोग प्रस्तावों का जिक्र करते हुए चटर्जी ने कहा कि उस समय इसका उचित तरीके से पालन किया गया था।
कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ राज्यसभा में लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को सभापति उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया है। उनके इस फैसले को विपक्षी पार्टियों ने असंवैधनिक करार दिया है।
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए हैं कि आखिर किस आधार पर नायडू ने इस प्रस्ताव को खारिज किया? वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि राज्यसभा के सभापति प्रस्ताव के नोटिस पर निर्णय नहीं दे सकते हैं क्योंकि उनके पास प्रस्ताव की योग्यता का निर्णय करने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई असल में लोकतंत्र को अस्वीकार करने और लोकतंत्र को बचाने के बीच की है। यदि सब कुछ राज्यसभा अध्यक्ष के सामने ही साबित करना है तो संविधान और 3 सदस्यीय जजों की समिति द्वारा किए जाने वाली जांच के एक्ट का कोई औचित्य नहीं है। संविधान का गला ना घोटें बीजेपी।