ऐसा माना जाता है कि सूखे मौसम और जल स्रोतों के सूखने के साथ मच्छरों की आबादी घट जाएगी, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। मच्छरों के पास ऐसे कठोर मौसम में भी बचे रहने के लिए गजब की रणनीति होती है। सूखे के दौरान वे खुद को हाइड्रेटेड बनाए रखने के लिए अधिक बार काटते हैं। यानी सूखे मौसम में मच्छर ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। इसके साथ ही मच्छरों ने बदलती जलवायु के साथ ठंडे मुल्कों में भी अपना नया ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है।
सिनसिनाटी विश्वविद्यालय का अध्ययन
सिनसिनाटी विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि सूखे के दौरान मच्छरों से होने वाले संक्रमण की घटनाएं हमेशा कम नहीं होती। जर्नल आईसाइंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मच्छर अपने शिकार को खोजने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं।
अगर मच्छर कार्बन डाइऑक्साइड को महसूस नहीं कर पाएंगे तो उन्हें काटने के लिए कोई नहीं मिलेगा। ऐसे में वे सूखे की स्थिति में जीवित नहीं रह पाएंगे। हालांकि मच्छरों की कुछ प्रजातियां ठंडे तापमान में भी जीवित रह सकती हैं। वे सर्दियों से पहले ही अपना भोजन एकत्र करती हैं और भारी मात्रा में चर्बी जमा कर लेती हैं। इसके बाद गर्मी पड़ते ही अंडे देना शुरू कर देती हैं।
गर्म होती सर्दियां इनके जीवित रहने और बढ़ने में मददगार
प्रमुख शोधकर्ता क्रिस्टोफर होम्स के अनुसार मच्छरों को सामान्य समझना भूल होगी बल्कि यह तो बेहद सख्त जीव होते हैं। हमने पाया है कि मच्छर लोगों को हमारी सोच से कहीं अधिक बार काटते हैं। जलवायु परिवर्तन से हालात और खराब हो रहे हैं, क्योंकि गर्म होती सर्दियां मच्छरों को जीवित रहने और बढ़ने में मदद करती हैं।