फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब में मंत्री बने सिद्धू, लेकिन क्या टिक पाएंगे अपनी कुर्सी पर, समझिए पूरा गणित?

Thu, 16 Mar 2017 01:42 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब में कांग्रेस सरकार में मंत्री पद की शपथ ले ली है। मंत्रियों को अभी विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है, इसलिए यह कहना मुश्किल है क‌ि सिद्धू को क्या जिम्मेदारी दी जाती है और नई सरकार में उनकी क्या भूमिका होगी। इस बीच दो सवाल उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें लेकर पंजाब की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर शख्स को उत्सुकता है। 
विज्ञापन


पहला- क्या सिद्धू को वो मनचाही भूमिका मिल गई, जिसके लिए उन्होंने भाजपा से बगावत कर राज्यसभा में सांसद की कुर्सी तक को ठुकरा दिया था? दूसरा- क्या सिद्धू इस कुर्सी पर टिक कर बैठ पाएंगे, यह सवाल इसलिए क्योंकि कॉमेडी शो से लेकर क्रिकेट में कमेंटरी तक जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियों को एक साथ निभाते हैं नवजोत सिंह सिद्धू। 
आइए इसी मुद्दे पर करते हैं नवजोत सिंह सिद्धू का रियलिटी चेक?

आप के लिए‌ सिद्धू ने छोड़ दी थी भाजपा

वैसे ज्यादा दिन नहीं हुए जब सिद्धू ने भाजपा छोड़कर पंजाब की राजनीति में खुलकर बल्लेबाजी करने के संकेत दिए थे। उस समय चर्चा चली थी कि आप में बड़ी भूमिका के लिए सिद्धू ने भाजपा और राज्यसभा की कुर्सी छोड़ी है। इसको लेकर कई दिनों तक सिद्धू की आप नेताओं से बातचीत चलती रही, लेकिन गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी। 

बताया जाता है जिस प्लेटफार्म पर सिद्धू की गाड़ी अटकी वो था मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाना, जिसके लिए अरविंद केजरीवाल समेत आप के तमाम बड़े नेता तैयार नहीं हुए, स्‍थानीय आप नेताओं ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। आप उन्हें जीतने पर उप मुख्यमंत्री पद देने को तो तैयार थी लेकिन मुख्यमंत्री पद नहीं। 
 
दाल गलती न देख सिद्धू ने खुद को कुर्बान करने में देरी नहीं की और पंजाब और पंजाबियत के नाम पर 'आवाज ए पंजाब' नाम से नया मोर्चा बना लिया। पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह के साथ मिलकर बनाए गए इस मोर्चे के बहाने सिद्धू ने पंजाब की आवाज को बुलंद करने और राज्य को बुरी ताकतों से दूर रखने का दावा किया। 

लेकिन सिद्धू की निगाहें बड़े लक्ष्य की ओर रही, वह जानते थे कि इस मोर्चे के साथ वह राज्य की राजनीति में मुख्यधारा में नहीं रह सकते इसलिए पिछले दरवाजे से वह कांग्रेस से बातचीत में लगे रहे। इसी बीच कैप्टन अमरिंदर से उन्होंने नजदीकियां बढ़ाई तो उन्होंने उनकी मुलाकात कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से कराई। जिसके बाद सिद्धू को महत्वपूर्ण भूमिका देने की शर्त पर उनका कांग्रेस में आने का रास्ता भी साफ हो गया।

क्या जो चाहते थे सिद्धू वो मिल पाया?

- फोटो : File Photo
हालांकि वह बड़ी भूमिका क्या होगी इसका खुलासा तो नहीं किया गया लेकिन राजनी‌तिक पंड़ितों का अंदाजा था कि सरकार आने पर उप मुख्यमंत्री का पद मिलने की शर्त पर ही सिद्धू माने हैं। 

हालांकि बताया ये भी जाता है कि खुद अमरिंदर इसके लिए तैयार नहीं हुए, क्योंकि उन्हें इस बात का अच्छी तरह एहसास था कि इतनी बड़ी भूमिका मिलने पर सिद्धू खुद उनके लिए भी चुनौती बन सकते हैं। सिद्धू का बेलाग अंदाज उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में कैप्टन किसी हाल में नहीं चाहेंगे कि सिद्धू को अपने कद के बराबर खड़े होने दिया जाए। 

हालांकि गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण में सिद्धू ने मंत्री पद की शपथ ले ली और जल्द ही उन्हें कोई विभाग भी दे दिया जाएगा। लेकिन सवाल अब यही है कि क्या यही वह भूमिका थी जिसे सिद्धू चाहते थे। 

अगर पंजाब सरकार में मंत्री बनने को बड़ी भूमिका माना जाए तो इससे पहले भी सिद्धू के घर में ही सरकार की लालबत्ती रह चुकी है, जब उनकी पत्नी नवजोत कौर बादल सरकार में स्वास्‍थ्य मंत्री थीं। ऐसे में खुद अब उनका मंत्री बन जाना बड़ी बात नहीं माना जा सकता। 

यह बात हजम करना भी बहुत मुश्किल है कि सिर्फ विधायक या राज्य में मंत्री बनने के लिए कोई राज्यसभा में सांसद की कुर्सी को छोड़ दे। वो भी तब जब राज्यसभा में सांसद रहने के साथ आप अपनी अन्य जिम्मेदारियों के लिए आसानी से समय निकाल सकते हैं, जिनमें सिद्धू अधिकतर समय व्यस्त रहते हैं। फिर सिद्धू को बड़ा क्या मिला? 
विज्ञापन

क्या अपनी नई भूमिका के साथ न्याय कर पाएंगे सिद्धू?

दूसरा सवाल ये है कि सिद्धू को जो भूमिका मिली है क्या वह उसके साथ पूरी तरह न्याय कर पाएंगे? ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब अमृतसर से सांसद रहते समय सिद्धू के खिलाफ उनके ही लोकसभा क्षेत्र में उनकी गुमशुदगी के पोस्टर लग गए थे। लोग इस बात से नाराज थे कि सांसद चुने जाने के बाद से ही वह अपने क्षेत्र को बहुत कम समय देते हैं और ज्यादातर समय मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में ही गुजारते हैं। 

सिद्धू आज भी मायानगरी से अलग नहीं हुए हैं। वह मशहूर कॉमेडी शो कामेटी नाइट विद कपिल से फुलटाइम जुड़े हुए हैं तो क्रिकेट की कमेंटरी में भी वो पूरा समय देते हैं। दो महीने से ज्यादा समय तक चलने वाले आईपीएल में सिद्धू की आवाज टीवी पर खूब सुनी जाती है साथ ही अन्य क्रिकेट सीरीज में भी सिद्धू कमेंटरी में व्यस्त रहते हैं। 

इसके अलावा भी कई रियलिटी शो और अन्य भूमिकाओं में व्यस्‍त रहने के कारण सिद्धू ज्यादातर समय पंजाब से बाहर ही रहते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या सिद्धू इन सब चीजों को छोड़कर मंत्री की अपनी नई भूमिका के लिए पूरा समय निकाल पाएंगे? 

एक सेलीब्रेटी के तौर पर सिद्धू एक साथ कई जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हैं तो क्या वो पूरा समय अपनी उस जनता को दे पाएंगे जिसने एक बार फिर भरोसा कर उन्हें चुनकर बड़ी जिम्‍मेदारी दी है?
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें