देश में अभी सौर ऊर्जा से 20 गीगावाट (20 हजार मेगावाट) बिजली उत्पादन हो रहा है। 2022 तक इसे 100 गीगावाट करने का लक्ष्य है। इसके लिए भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) में अब तक के सबसे बड़े 91 अरब रुपये के निवेश का ऐलान किया है।
इससे 15 अन्य देशों में भी प्लांट लगेंगे। आइए जानते हैं कि आईएसए और भारत कैसे मिलकर इस लक्ष्य को पाने की कोशिश करेंगे। और देश में कैसे है सौर ऊर्जा के लिए अनंत संभावनाएं।
कम है सौर ऊर्जा, इसलिए विस्तार की संभावना
देश में अभी रिन्यूएबल स्रोत से मात्र 58 गीगावाट बिजली उत्पादन होता है। यह कुछ उत्पादन का 18.5 प्रतिशत है। इसमें से भी सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी एक तिहाई है। यानी इसमें विस्तार की काफी संभावना है। दुनिया में भी सौर ऊर्जा उत्पादन का मात्र .45 प्रतिशत है।
बीचोंबीच से होकर गुजरती है कर्क रेखा
कर्क रेखा भारत के बीचोंबीच से होकर गुजरती है। इसलिए यहां साल भर सूर्य की अच्छी रोशनी रहती है।
300 दिन धूप रहती है भारत में साल में
3000 घंटे रोशनी रहती इतने दिनों में
5 हजार ट्रिलियन किलोवाट के बराबर यह ऊर्जा
अच्छा सौर विकिरण
1800 केडब्ल्यूएच प्रति वर्ग मीटर तक सौर विकिरण होता है देश के ज्यादातर हिस्सों में
02 राज्यों राजस्थान और गुजरात के उत्तरी हिस्से में सबसे अच्छा विकिरण मिलता है
कई गुना बिजली उत्पादन संभव
1 फीसदी भूमि पर लगे सोलर प्लांट से देश की ऊर्जा जरूरतों को 2031 तक पूरा किया जा सकता है
आईएसए बढ़ाएगा उत्पादन
आईएसए का लक्ष्य 2030 तक एक हजार गीगावाट बिजली उत्पादन करना है। मालूम हो कि पिछले दो साल में 61 देश इस संगठन के सदस्य बन चुके हैं और तेजी से सौर ऊर्जा के लिए कार्य कर रहे हैं।
भारत तेजी से कर रहा काम
पेरिस समझौते के तहत भारत ने 40 फीसदी बिजली उत्पादन गैर जीवाश्म स्रोतों (पवन, सौर आदि) से करने का लक्ष्य बनाया है। इसलिए भारत सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है। इस वक्त दुनिया के छह बड़े सोलर प्रोजेक्ट में से तीन भारत में हैं।
चीन से लेनी होगी सीख
चीन ने पिछले साल अपनी सौर क्षमता में 81 प्रतिशत का इजाफा किया है। यहां सौर से 130 गीगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। वहीं बीजिंग का लक्ष्य 2030 तक कुल बिजली का बीस प्रतिशत उत्पादन रिन्यूएबल स्रोत से करना है।