ग्रहण के दौरान सूर्य की पृथ्वी से 15 करोड़ 2 लाख 35 हजार 882 किमी की दूरी रह जाएगी। इस दौरान चांद भी तीन लाख 91 हजार 482 किमी की दूरी से अपने पथ से गुजर रहा होगा। अगर चांद इस दौरान पृथ्वी के और पास होता तो यह ग्रहण एक पूर्ण सूर्य ग्रहण बन जाता। इसी तरह अगर सूर्य थोड़ा और पास होता तो ग्रहण का नजारा बदल जाता। लेकिन अब यह ग्रहण वलयाकार होगा, यानी चांद पूरी तरह से सूर्य को नहीं ढंक पाएगा। करीब 30 सेकंड के लिए ही चांद सूर्य के बड़े भाग को कवर करेगा।
सूर्य ग्रहण के प्रकार
पूर्ण ग्रहण- जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढंक लेता है तो यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है।
आंशिक ग्रहण- जब चंद्रमा सूर्य को आंशिक रूप से ढंकता है तो इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं।
वलयाकार सूर्य ग्रहण- जब सूर्य के मध्य से चंद्रमा की छाया गुजरती है तो उसके चारों तरफ एक चमकीला गोल घेरा बन जाता है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है।