ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विवि, स्कॉटलैंड के एबरडीन विवि और चीन के नानजिंग कृषि विवि के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन जर्नल सॉइल नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में मिट्टी के योगदान ने एक बड़ी समस्या पैदा कर दी है।
मिट्टी से होने वाले उत्सर्जन से वैश्विक तापमान में लगभग 15 फीसदी की वृद्धि होती है। यह उत्सर्जन मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और मीथेन के रूप में कृषि पद्धतियों, भूमि-उपयोग परिवर्तनों और खाद्य की बढ़ती वैश्विक मांग से प्रेरित हैं।
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एक नजर अध्ययन पर
ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विवि, स्कॉटलैंड के एबरडीन विवि और चीन के नानजिंग कृषि विवि के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन जर्नल सॉइल नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में मिट्टी के योगदान ने एक बड़ी समस्या पैदा कर दी है।
सामने है चुनौतियां
अब इसमें चुनौती यह है कि कैसे इसके माध्यम से खाद्य उत्पादन को बढ़ाना जारी रखा जाए और साथ ही उत्सर्जन को कम किया जाए। मिट्टी को कार्बन का भण्डार माना जाता है। कार्बन डाइऑक्साइड मिट्टी से उत्पन्न होने वाली गर्मी का 74 फीसदी हिस्सा है। यह मिट्टी से उत्सर्जित होने वाली सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है। इसके बाद नाइट्रस ऑक्साइड 17 और मीथेन 9 फीसदी है। मीथेन ऊष्मा को रोकने में अधिक शक्तिशाली है, लेकिन जीवनकाल बहुत कम होता है। दूसरी ओर कार्बन डाइऑक्साइड जिद्दी है। इसलिए हमेशा हवा में रह सकती है।
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यह हैं प्रमुख वजह
मृदा उत्सर्जन से वैश्विक तापमान बढ़ने की कई वजहें हैं। सूखे की वजह से मिट्टी की सतह टूट जाती है और सूख जाती है। इससे मिट्टी का कार्बन ऑक्सीडाइज हो जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में बाहर आता है। नाइट्रस ऑक्साइड मिट्टी से ज्यादा उत्सर्जित होने की वजह खेती में नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का इस्तेमाल ज्यादा होना। इसके अलावा आर्द्रभूमि से नाइट्रस ऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं।
सीमित करने की जरूरत
कार्बन डाई आक्साइड का उत्सर्जन पिछले 10 से 15 सालों में 40 गुना बढ़ गया है। शोधकर्ताओं ने जैव ईंधन उत्पादन सहित भूमि उपयोग में और अधिक परिवर्तन को रोकने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को सीमित करने की तत्काल आवश्यकता पर विशेष रूप से जोर दिया है।