पहले अपराजिता सम्मान समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए मल्लिका नड्डा ने कहा कि प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि समय को देखते हुए महिलाओं को उनका उचित स्थान और सम्मान दिलाने के लिए नीतियों को ज्यादा समावेशी बनाया जाना चाहिए।
चौधरी चरण सिंह के द्वारा स्थापित किसान ट्रस्ट ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं का सम्मान किया और उनकी आर्थिक मदद की। एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को चेक सौंपते हुए प्रसिद्ध समाज सेविका मल्लिका नड्डा ने कहा कि किसी राष्ट्र या समाज के विकास का सबसे सशक्त पैमाना महिलाओं को मिलने वाली स्वतंत्रता और उनकी सुख-समृद्धि होती है। यदि कोई समाज अपनी महिलाओं का सम्मान नहीं करता तो उसका पतन अवश्यंभावी हो जाता है।
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पहले अपराजिता सम्मान समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए मल्लिका नड्डा ने कहा कि प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि समय को देखते हुए महिलाओं को उनका उचित स्थान और सम्मान दिलाने के लिए नीतियों को ज्यादा समावेशी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के वित्तीय समावेशन के लिए नीतियों में बदलाव करना भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि आज महिलाएं आगे बढ़कर चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं स्वीकार कर रही हैं और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करने में अपना योगदान दे रही हैं।
किसान ट्रस्ट की ट्रस्टी चारू सिंह ने कहा कि अब तक महिलाओं के सशक्तिकरण के कार्य और उन पर चर्चाएं केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित होती थीं, लेकिन बदलते समय के साथ अब यह दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी पहुंच रही हैं। किसान ट्रस्ट के माध्यम से आयोजित परिचर्चा के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में भी काफी जागरूकता आएगी और वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति ज्यादा जागरूक और सशक्त हो सकेंगी।
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चारू सिंह ने कहा कि महिलाएं चाहे जिस क्षेत्र की हों या कैसी भी परिस्थिति में काम करती हों, लेकिन देखा यही जाता है कि उनके मुद्दे और उनकी परेशानियां लगभग एक जैसी होती हैं। ऐसे में सबको साथ आकर संघर्ष करना चाहिए जिससे आने वाला समय महिलाओं के लिए ज्यादा सुखद हो। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सुखद भविष्य के लिए वे सब मिलजुलकर हर कार्य करने के लिए सदैव तैयार हैं। किसान ट्रस्ट की इस परिचर्चा में क्षेत्र के वरिष्ठ लोगों, नागरिकों, वकीलों, अध्यापकों, छात्रों और स्थानीय महिलाओं-छात्राओं ने भाग लिया।